नई दिल्‍ली. चीन ने अपने उत्‍तर-पश्‍चिमी इलाके में स्‍थित झिंजियांग प्रांत की दर्जनों मुस्‍लिम महिलाओं को हिरासत में लिया है. इन महिलाओं पर गिलगिट बाल्‍ट‍िस्‍तान के पाकिस्‍तानी पुरुषों से शादी करने का आरोप है. गिलगिट बाल्‍टिस्‍तान संसद में सर्वसम्‍मति से पास हुए रिज्‍योलूशन में इस मामले का उल्‍लेख किया गया, जिसके बारे में रविवार को पाकिस्‍तानी सांसदों ने बताया। Also Read - भारत की मेजबानी में 30 नवंबर को एससीओ नेताओं की बैठक में भाग लेंगे चीन के प्रधानमंत्री

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विवॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, पारित प्रस्ताव के अनुसार, उसने पाकिस्तान सरकार को 50 से अधिक चीनी पत्नियों की रिहाई के लिए तत्काल कदम उठाने के लिए कहा है, जिन्हें उनके अनुसार, पिछले वर्ष जब वे झिंजियांग प्रांत के अपने स्थानीय शहरों में थे, तो उनकी हिरासत में लिया गया था. इस बारे में रिश्तेदारों ने सूचना दी. विधानसभा के डिप्टी स्पीकर जाफरूल्लाह खान ने विभिन्न मीडिया आउटलेट्स के हवाले से कहा था कि चीनी महिलाओं को झिंजियांग में जातीय उइघुर मुस्लिम समुदाय पर चीन द्वारा आतंकवाद विरोधी अभियान के दौरान हिरासत में लिया गया था. Also Read - Chinese APP पर बैन से व्‍यथित चीन, भारत से सामान्य ट्रेड रिश्‍ते बहाल करने का किया आग्रह

सांसद ने दिया जोर

क्षेत्रीय सांसदों ने जोर दिया कि गिलगिट बाल्टिस्‍तान और झिंजियांग के बीच अंतर जातिय विवाह का इतिहास दशकों पुराना है. दोनों सीमावर्ती क्षेत्रों में बहुत करीबी सांस्कृतिक संबंध हैं. उन्होंने जोर दिया कि हिरासत में ली गईं चीनी महिलाओं के किसी भी कट्टरपंथी आतंकवाद से कोई संबंध नहीं था और वे बिल्कुल निर्दोष थीं. रिपोर्ट के मुताबिक, चीनी और पाकिस्तानी संघीय अधिकारी अभी तक आरोपों पर प्रतिक्रिया नहीं दे रहे हैं.

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चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर का गेटवे है यह क्षेत्र

गिलगिट बाल्टिस्‍तान क्षेत्र, बड़े पैमाने पर आर्थिक सहयोग सौदा का गेटवे है, जिसे इस्लामाबाद और बीजिंग द्वारा शुरू किया गया चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर (सीपीईसी) कहा जाता है. 62 अरब डॉलर का आर्थिक गलियारा का निर्माण पाकिस्तान में सड़कों, रेल, बिजली संयंत्रों और आर्थिक मुक्त क्षेत्रों के निर्माण का एक संयोजन है. वर्तमान में पाकिस्तान के हजारों चीनी सीपीईसी परियोजना पर काम कर रहे हैं.