काठमांडू: तेज़ी से फैल रहे कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए नेपाल में मंगलवार से हफ्तेभर का बंद (लॉकडाउन) शुरू हो गया. यह वायरस दुनिया भर में करीब 17000 लोगों की जान ले चुका है और इससे 3.8 लाख लोग संक्रमित हैं. Also Read - कोरोना के कारण मजदूरों का पलायन: कोर्ट ने तलब की रिपोर्ट, डर दहशत को बताया वायरस से भी बड़ी समस्या

पांबदियों के पहले दिन बाजार बंद थे और सड़कें सुनी पड़ी थी. सिर्फ सुरक्षा बलों और मेडिकल कर्मियों की गाड़ियां ही सड़क पर दिख रही थी. Also Read - Covid-19: निजामुद्दीन के मरकज में सैंकड़ों कोरोना संदिग्ध, दिल्ली सरकार ने दिया मौलाना पर FIR दर्ज करने का आदेश

कोविड-19 की रोकथाम और नियंत्रण के लिए उप प्रधानमंत्री ईश्वर पोखरेल के नेतृत्व वाली उच्च स्तरीय समिति की बैठक में देशभर में बंद करने का निर्णय हुआ. यह बैठक काठमांडू में कोरोना वायरस के दूसरे मामले की पुष्टि होने के कुछ घंटों बाद हुई थी. Also Read - COVID-19 से दुनिया में मौतों का आंकड़ा 34,610, संक्रमण के 7 लाख 27 हजार से ज्‍यादा केस

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की सलाह के बाद, नेपाल सरकार ने कोरोना वायरस के संभावित प्रसार को रोकने के लिए बंद लागू किया.

सरकार ने लोगों से घरों में रहने की अपील की. हालांकि दवाई की दुकानें और गैस स्टेशन खुले रहेंगे. बंद का उल्लंघन करने पर एक हजार रुपये का जुर्माना और जेल या दोनों हो सकती हैं.

नेपाल सरकार ने मंगलवार को जमीनी रास्ते से भारत से नेपाल के नागरिकों को लौटने की इजाजत देने का फैसला किया. वे मंगलवार शाम तक ही वापस आ सकते हैं और उन्हें 14 दिनों के लिए अलग रहना होगा.