क्या नोबेल पीस प्राइज के लिए नॉमिनेट भी नहीं हो पाए ट्रंप? 10 प्वाइंट में समझें क्यों अवॉर्ड से बहुत दूर

Trump Nobel Peace Prize: नोबेल शांति पुरस्कारों के लिए नामित करने की समयसीमा 31 जनवरी 2025 थी, यानी डोनाल्ड ट्रंप के 20 जनवरी को राष्ट्रपति बनने के 11 दिन बाद.

Published date india.com Published: October 6, 2025 11:18 AM IST
क्या नोबेल पीस प्राइज के लिए नॉमिनेट भी नहीं हो पाए ट्रंप? 10 प्वाइंट में समझें क्यों अवॉर्ड से बहुत दूर
(photo credit ai for representation only)

Trump Nobel Peace Prize: वो लम्हा आ गया जिसका अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को इंतजार है. ट्रंप ने बार-बार इच्छा व्यक्त की है कि उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार मिलना चाहिए क्योंकि उन्हें सात युद्ध रुकवाए हैं. और अब 6 अक्तूबर यानी सोमवार से नोबेल पुरस्कारों की घोषणा होनी शुरू भी हो जाएगी. वहीं नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा 10 अक्तूबर को होगी. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या ट्रंप को इस बार नोबेल शांति पुरस्कार मिल पाएगा? क्यों विशेषज्ञों को लग रहा है कि ट्रंप नोबेल पुरस्कार से काफी दूर हैं? आइये 10 प्वाइंट में इसे समझते हैं.

  1. नोबेल शांति पुरस्कारों के लिए नामित करने की समयसीमा 31 जनवरी 2025 थी. वहीं ट्रंप 20 जनवरी को राष्ट्रपति बने. नेतन्याहू, पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ ने ट्रंप को काफी बाद में नामित किया. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि ट्रंप का नॉमिनेशन हुआ या नहीं.
  2. युद्ध रुकवाने के दावे पर सवाल- ट्रंप ने भारत पाकिस्तान के बीच सीजफॉयर कराने का दावा किया, लेकिन भारत ने इसका खंडन किया.
  3. एक नहीं, ट्रंप के कई गलत दावे- सर्बिया-कोसोवो, रवांडा और कांगो के बीच स्थायी शांति कभी नहीं आई. ये सीमा विवाद पुराने हैं. कंबोडिया और थाईलैंड के बीच सीजफायर आसियान (ASEAN) की पहल पर हुआ, लेकिन ट्रंप बार-बार अपना राग अलाप रहे हैं
  4.  गाजा में शांति नहीं- ट्रंप का गाजा पीस प्लान भी खतरे में है क्योंकि ट्रंप पर इजरायल के समर्थन का आरोप है.
  5. नहीं रुका रुस-यूक्रेन युद्ध- ट्रंप की कई कोशिशों के बाद भी यूक्रेन रूस युद्ध जारी है.
  6. अमेरिका के भीतर से भी मिलेगा झटका-ट्रंप के कई कदम गैरलोकतांत्रिक लगते हैं, जैसे हार्वर्ड जैसे संस्थानों की फंडिंग रोकना और अवैध प्रवासियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई. जैसे नेशनल गार्ड्स को उतारना .
  7. धमकी देकर नोबेल मांगना-ट्रंप ने कहा है कि उन्हें अवॉर्ड न मिलना अमेरिका का अपमान होगा. पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट ओस्लो के निदेशक नीना ग्रेगर ने कहा है कि चयन समिति दबाव में आना पसंद नहीं करती.
  8. ग्रीनलैंड और कनाडा का मुद्दा-डेनमार्क से जबरन ग्रीनलैंड को मांगना और कनाडा को यूएस का 51वां राज्य बनाने जैसे बयान.
  9. नोबेल मानदंडों से बेमेल: यह पुरस्कार निरस्त्रीकरण, मानवाधिकारों और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग में दीर्घकालिक योगदान पर केंद्रित है. ट्रम्प के “अमेरिका फ़र्स्ट” अलगाववाद और बहुपक्षीय समझौतों (जैसे, पेरिस जलवायु समझौता, ईरान परमाणु समझौता) से पीछे हटने को समिति इन लक्ष्यों के प्रतिकूल मानती है.
  10. आक्रामक बयानबाजी और धमकियां: ईरान को “विनाश” की चेतावनी देने या सहयोगियों को बलपूर्वक धमकाने जैसे बयानों को संयुक्त राष्ट्र चार्टर के शांतिपूर्ण समाधान पर ज़ोर देने के उल्लंघन के रूप में देखा जाता है, जो पुरस्कार द्वारा अहिंसक कूटनीति को बढ़ावा देने के साथ टकराव करता है.

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