नई दिल्ली: कोरोना वायरस से निपटने के लिए अग्रणी मोर्चे पर काम कर रहे स्वास्थ्यकर्मियों के अथक प्रयासों की सराहना करते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्‍ल्‍यूएचओ) ने मंगलवार को कहा कि दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों को वर्ष 2030 तक नर्सों और एएनएम की संख्या में 19 लाख बढोतरी करने के लिए काम करने की जरूरत है. Also Read - सऊदी अरब ने फिर से खोलीं 90 हजार मस्जिदें, मक्का अब भी बंद

डब्ल्यूएचओ दक्षिण-पूर्व एशिया की क्षेत्रीय निदेशक डॉ. पूनम खेत्रपाल सिंह ने विश्व स्वास्थ्य दिवस के मौके पर कहा कि हर किसी को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधा प्रदान करने, बीमारी रोकने, जच्चा-बच्चा की देखभाल, बच्चों के टीकाकरण, स्वास्थ्य सलाह आदि मुहैया कराने की दिशा में नर्स और एएनएम जैसे स्वास्थ्यकर्मियों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है. Also Read - उत्तराखंड कैबिनेट को क्‍वारंटाइन में भेजने की जरूरत नहीं: स्वास्थ्य सचिव

उन्होंने कहा कि हमें यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि सभी लोगों की स्वास्थ्य जरूरतें पूरी करने के लिए नर्स, एएनएम का पर्याप्त कार्यबल मौजूद हो. विश्व स्वास्थ्य संगठन की स्थापना के उपलक्ष्य में आयोजित विश्व स्वास्थ्य दिवस का विषय नर्सिंग और एएनएम-आशा कार्यबल को मजबूत करने का है. वर्ष 2015 में डब्ल्यूएचओ दक्षिण-पूर्व एशिया ने स्वास्थ्य कर्मियों के नाम एक दशक की शुरुआत की थी. इसका उद्देश्य इस क्षेत्र में स्वास्थ्य कर्मियों की कमी और कुशल लोगों के अंतराल को पाटना है. Also Read - Coronavirus Lockdown: स्कूलों को फिर से खोलने की योजना पर अभिभावकों की बढ़ी चिंता, जानें क्या है सरकार की प्लानिंग

नर्स और एएनएम के प्रशिक्षण में सुधार, ग्रामीण स्तर पर उनकी तैनाती शीर्ष प्राथमिकता है. वर्ष 2014 में 29 लाख नर्स की तुलना में वर्ष 2018 तक क्षेत्र में 35 लाख नर्स और एएनएम थीं. इस तरह वर्ष 2014 में प्रति दस हजार आबादी पर 16 नर्स थीं जो 2018 में बढ़कर 18 हो गयी.

क्षेत्रीय निदेशक ने कहा कि बहुत प्रगति हुई है लेकिन और कदम उठाने की जरूरत है. वैश्विक स्तर पर दस हजार की आबादी पर 37 नर्सों की उपलब्धता और दस हजार पर कम से कम 40 नर्सों की मौजूदगी की तुलना में क्षेत्रीय औसत कम है. वर्ष 2030 तक क्षेत्र में 19 लाख नर्स और एएनएम की जरूरत होगी.

(इनपुट भाषा)