वॉशिंगटन: दुनियाभर में करोना वायरस के इलाज के लिए वैक्सीन निर्माण व ट्रायल का काम चल रहा है. इसी कड़ी में बुधवार को जॉनसन एंड जॉनसन कंपनी ने बताया कि दूसरे चरण के ट्रायल के सफल होने के बाद अब वे तीसरे चरण के ट्रायल में प्रवेश कर रहे हैं. कंपनी ने कहा कि ट्रायल में दुनियाभर के 200 से अधिक जगहों के कुल 60,000 लोगों पर अनुमति के बाद परीक्षणकिया जाएगा. कंपनी बताया कि इस बाबत फंडिंग अमेरिकी नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ (NIH) कर रहा हैAlso Read - चीन में फिर बढ़ा कोरोना का खतरा, बीजिंग समेत कई शहरों में तेजी से फैल रहा डेल्टा वेरिएंट

कंपनी ने कहा कि तीसरे चरण के ट्रायल में प्रवेश करते ही जॉनसन एंड जॉनसन दुनिया की 10वीं ऐसी कंपनी बन जाएगी जो तीसरे चरण में ट्रायल करेगी. साथ ही अमेरिका में हम चौथी कंपनी बन जाएंगे. जॉनसन एंड जॉनसन की सहायक कंपनी Janssen ने कहा कि इस दवा का निर्माण फायदा कमाने के लिए नहीं किया जा रहा है. वैक्सीन के प्रभाव साबित होने के बाद इसे 2021 में अपातकालीन स्वीकृति के लिए तैयार किया जाएगा. Also Read - केंद्र ने वंचितों, भिखारियों के लिए विशेष टीकाकरण सत्र आयोजित करने को कहा, राज्यों को लिखा खत

कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एलेक्स गोर्सकी ने कहा कि दुनियाभर में कोरोना ने लोगों के जीवन पर प्रभाव डाला है. हमारा एक ही लक्ष्य है कि अपनी पहुंच को वैश्विक स्तर पर ले जाना और रिसर्च अनुसंधान की वैश्विक सहायता के माध्यम से इस माहमारी को खत्म करना. Also Read - कोरोना का डेल्टा वेरिएंट बेहद खतरनाक, चेचक की तरह आसानी से बन सकता है गंभीर संक्रमण का कारण- रिपोर्ट

बता दें कि अमेरिकी सरकार ने J&J को Operation Warp Speed के तहत फंडिंग में 1.45 बिलियन डॉलर दिया है। बता दें कि जिस तकनीक का इस्तेमाल कोरोना की वैक्सीन बनाने में की जा रही है. इसी तकनीक का इस्तेमाल कंपनी ने इबोला की वैक्सीन बनाने में किया था. जिसकी अनुमति यूरोपियन कमीशन द्वारा दी गई थी. बता दें कि पूरी दुनिया में कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित अमेरिका, भारत और ब्राजील हैं.