
Gargi Santosh
गार्गी संतोष, जी मीडिया के India.com में सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वह हाइपरलोकल, नेशनल और वर्ल्ड सेक्शन की जिम्मेदारी संभाल रही हैं. गार्गी को लाइफस्टाइल, हेल्थ, टेक्नोलॉजी, और ... और पढ़ें
चक्रवात तूफान दित्वाह की वजह से श्रीलंका में जान-माल को बड़ा नुकसान हुआ है. इस संकट की घड़ी में प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके से फोन पर बात की और गहरी संवेदना व्यक्त की. पीएम मोदी ने कहा कि भारत के लोग दुख की इस घड़ी में पूरी मजबूती से श्रीलंका के साथ खड़े हैं.
उन्होंने बताया कि भारत लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है, और जरूरत पड़ते ही हरसंभव मदद देने के लिए तैयार है. प्रधानमंत्री की इस भावनात्मक प्रतिक्रिया ने दोनों देशों के गहरे रिश्ते और पड़ोसी धर्म की मिसाल को एक बार फिर मजबूत किया है.
Spoke with President Dissanayake and conveyed heartfelt condolences on the tragic loss of lives and the widespread devastation caused by Cyclone Ditwah. As a close and trusted friend, India stands firmly beside Sri Lanka and its people in this difficult hour.
India will continue…
— Narendra Modi (@narendramodi) December 1, 2025
चक्रवात के बाद श्रीलंका में बचाव और राहत कार्य बेहद चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं. इस बीच, राष्ट्रपति दिसानायके ने भारत द्वारा भेजी गई राहत सामग्री, रेस्क्यू टीमों और ऑपरेशन सागर बंधु के तहत की गई सहायता के लिए धन्यवाद कहा. उन्होंने कहा कि संकट के समय भारत ने जिस तरह तेजी से कदम उठाया और प्रभावित इलाकों में सहायता पहुंचाई, उसने लाखों लोगों को आशा दी है. श्रीलंका के राष्ट्रपति ने यह भी बताया कि देश की जनता भी भारत की इस समय पर की गई मदद की बेहद सराहना कर रही है.
प्रधानमंत्री ने बातचीत के दौरान भरोसा दिलाया कि ऑपरेशन सागर बंधु के तहत भारत श्रीलंका को हर स्तर पर सहायता प्रदान करता रहेगा. भारतीय वायुसेना लगातार आपदाग्रस्त क्षेत्रों से लोगों को सुरक्षित निकाल रही है. अब तक 40 श्रीलंकाई सैनिक और 104 भारतीय नागरिक रेस्क्यू किए जा चुके हैं. भारत का यह अभियान न सिर्फ मानवीय भावना को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि पड़ोसी देशों का एक-दूसरे की मदद के लिए आगे आना कितना जरूरी है.
श्रीलंका में चक्रवात दित्वाह का असर बेहद भयावह रहा है. डिजास्टर मैनेजमेंट सेंटर (DMC) के अनुसार, अब तक 334 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 370 लोग लापता बताए जा रहे हैं. सबसे अधिक तबाही कैंडी शहर में हुई है, जहां अकेले 88 लोगों की जान गई और 150 लोग अब तक लापता हैं. बादुल्ला, नुवारा एलिया और मटाले में भी भारी नुकसान की खबरें हैं. देशभर में करीब 11 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं, जिनमें 3 लाख से अधिक परिवार शामिल हैं. राहत कार्य तेजी से जारी है, लेकिन तबाही की तस्वीर बेहद गंभीर नजर आ रही है.
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