बगदाद: बगदाद के पवित्र शिया शहर कर्बला में भगदड़ में 31 श्रद्धालुओं की मौत हो गई और 100 अन्य लोग घायल हो गए. यह घटना मुहर्रम के आशुरा के दौरान हुई. अधिकारियों ने यह जानकारी दी. रिपोर्ट के अनुसार, इराकी स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता सायफ अल-बद्र ने कहा कि यह घटना आशुरा की प्रमुख शिया परंपरा के दौरान हुई, जब कर्बला में इमाम हुसैन के मकबरे में हजारों लोगों को प्रवेश करने दिया गया. कर्बला, बगदाद से 110 किमी दूर है.

अल बद्र ने एक बयान में कहा, “कर्बला भगदड़ में मरने वालों की संख्या बढ़कर 31 हो गई है और 100 अन्य घायल हुए हैं. घायलों में से 10 की हालत गंभीर है.” यह धार्मिक आयोजन मुहर्रम महीने की दस तारीख को इमाम हुसैन की शहादत के याद में मनाया जाता है. सातवीं शताब्दी में कर्बला में बादशाह यजीद की फौज से जंग में मोहम्मद साहब के नाती इमाम हुसैन शहीद हुए थे. उन्होंने यजीद की हुकूमत को अनैतिक और इस्लाम विरोधी बताते हुए उसे स्वीकार करने से मना कर दिया था.

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वाकया सन 680 (61 हिजरी) का है. इराक में यजीद नाम इस खलीफा (बादशाह) ने हुसैन को यातनाएं देना शुरू कर दिया. तंग आकर हुसैन ने मदीना छोड़ने का इरादा किया. वह हज के लिए मक्का पहुंचे. यहां उन्हें पता चला कि यजीद के लोग उनका क़त्ल कर सकते हैं. वह मक्का को खून खराबा से नापाक नहीं करना चाहते थे, इसलिए उन्होंने मक्का छोड़ दिया. उनके साथ परिवार, बच्चे, बूढ़े बुजुर्ग सहित कुल 72 लोग थे. वह कूफे शहर की ओर बढ़ रहे थे, तभी यजीद की सेना ने उन्हें बंदी बना लिया. और कर्बला (इराक का प्रमुख शहर) ले गई. कर्बला में भी यजीद ने दबाव बनाया कि उसकी बात मान लें, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. 10वें मुहर्रम को यजीद की सेना ने हमला शुरू कर दिया. 10 अक्टूबर, 680 ( इस्लामी 61 हिजरी) को सुबह इमाम और उनके सभी साथी नमाज पढ़ रहे थे, तभी यजीद की सेना ने घेर लिया. इमाम व उनके साथी नमाज पढ़ते रहे. इसके बाद हुसैन व उनके साथियों पर शाम तक हमला कर सभी को ख़त्म कर दिया.