Chernobyl: चेर्नोबिल न्यूक्लियर पावर प्लांट हादसे को 40 साल हो चुके हैं. यह हादसा यूक्रेन (तात्कालिक सोवियत संघ) में हुआ था. अब नए शोध में खुलासा हुआ है कि प्लांट में काम करने वाले लोगों के बच्चों के डीएनए अब भी म्यूटेट हो रहे हैं.
किसने किया शोध
बॉन यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने यह शोध किया है. उन्होंने देखा है कि पावर प्लांट में सफाई करने वाले वर्कर्स के बच्चों के DNA में म्यूटेशन की संख्या ज़्यादा है. स्टडी से यह भी पता चला कि माता-पिता के रेडिएशन के संपर्क में आने की तीव्रता और बच्चों में म्यूटेशन की संख्या के बीच सीधा संबंध था.
अब तक, साइंटिस्ट्स को पक्का नहीं पता था कि रेडिएशन के संपर्क में आने वाले लोगों के बच्चों को अपने माता-पिता का जेनेटिक डैमेज विरासत में मिलेगा या नहीं.
कैसे हुआ शोध
सभी नए DNA म्यूटेशन देखने के बजाय, रिसर्चर्स ने ‘क्लस्टर्ड डे नोवो म्यूटेशन’ (cDNMs) नाम की चीज की तलाश की.
क्या होता है क्लस्टर्ड डे नोवो म्यूटेशन
ये तब होते हैं जब माता-पिता के DNA में नहीं पाए जाने वाले दो या दो से ज़्यादा म्यूटेशन एक साथ जमा हो जाते हैं. इससे पता चलता है कि DNA स्ट्रैंड टूट गया है और बुरी तरह से रिपेयर हुआ है.रिसर्चर्स ने चेर्नोबिल वर्कर्स के 130 बच्चों, रेडिएशन के संपर्क में आए जर्मन मिलिट्री रडार ऑपरेटरों के 110 बच्चों और 1,275 आम लोगों के जीनोम को सीक्वेंस किया. औसतन, जिन बच्चों के माता-पिता ने चेर्नोबिल को साफ करने में मदद की थी, उनमें 2.65 cDNMs थे, जबकि रडार ऑपरेटरों के बच्चों में 1.48 थे. तजिन बच्चों केमाता-पिता रेडिएशन के संपर्क में नहीं आए थे, उनमें प्रति व्यक्ति केवल 0.88 cDNMs थे.
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