बीजिंग। चीन ने डोकलाम विवाद पर 15 पेज का एक और बयान जारी किया है. इसमें भारत को गलत ठहराते हुए बिना शर्त वापस जाने की नसीहत दी गई है. अपने बयान में चीन ने आरोप लगाया कि जून में भारत के 270 से ज्यादा जवान बुलडोजर लेकर उसके इलाके में घुस आए थे और सड़क निर्माण के काम में बाधा पहुंचाई थी. भारतीय सेना के जवानों ने वहां तंबू गाड़ दिए और अभी भी 40 जवान बुलडोजर के साथ उसी इलाके में मौजूद हैं.

रिपोर्ट में कहा गया है कि भूटान के बहाने भारत हमारे मामले में दखल दे रहा है. भारत को फौरन बिना शर्त वहां से अपनी सेना हटा लेनी चाहिए. चीन का मानना है कि 1890 में चीन और ब्रिटिश शासन के बीच एक करार हुआ था. इसके मुताबिक, डोकलाम पठार बिना किसी विवाद के चीन का हिस्सा माना गया था. सीमा विवाद पर दोनों देशों के बीच बातचीत में भी यह मुद्दा उठता आया है.

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चीन ने कहा कि अपने इलाके मे रोड बनाना हमारा हक है. इससे स्थानीय यातायात को बेहतर किया जा सकता है. चीन ने सड़क बनाने के लिए कोई बॉर्डर क्रॉस नहीं किया है. 18 जून को भारत ने सिक्किम सेक्टर से चीन के इलाके में घुसपैठ की. भारतीय जवानों का का सीमा पार करके हमारे इलाके में आना बहुत गंभीर मामला है. ये चीन की संप्रभुता और उसकी अखंडता से छेड़छाड़ है.

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चीन ने मांग की है कि भारत सीमा रेखा के पार से अपने जवानों को फौरन वापस बुला ले. साथ ही साथ यह जांच करवाए कि कैसे जवानों ने गैरकानूनी तरीके से सीमा पार करके दूसरे देश की सरजमीं पर पहुंचे. इसी तरीके से दोनों देशों के बीच शांति बहाल हो सकती है. रिपोर्ट के आखिर में लिखा है कि क्षेत्र में शांति बहाली के लिए दोनों देशों को अपने मूलभूत इंटरेस्ट को वैश्विक मंच पर रखना होगा.

By Aditya Dwivedi