ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच होगी बातचीत? अमेरिका-चीन के आगे के रिश्ते को लेकर क्या बता गए मार्को रूबियो

डोनाल्ड ट्रंप के एशियाई दौरे से जुड़े प्रेस वार्ता के दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा कि अमेरिका पाकिस्तान के साथ रणनीतिक संबंध बढ़ाने का अवसर देख रहा है, जिससे भारत में चिंताएं उठनी स्वाभाविक हैं. उन्होंने यह भी कहा कि भारत कूटनीति में परिपक्व देश है और अमेरिका कई देशों के साथ साझा हितों पर काम करने की दिशा में आगे बढ़ेगा.

Published date india.com Published: October 26, 2025 4:57 PM IST
Marco Rubio, Xi Jinping, Donald Trump
Marco Rubio, Xi Jinping, Donald Trump

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने दूसरे कार्यकाल में पहली बार एशिया दौरे पर निकले हैं. इस दौरान ट्रंप चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से भी मुलाकात होने की संभावना है. टैरिफ विवाद के बीच दोनों नेताओं की मुलाकात पर पूरी दुनिया की नजर है.  इसी बीच शी-ट्रंप की मुलाकात को लेकर अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो का बयान भी सामने आया है. रुबियो ने दोनों नेताओं की मुलाकात को लेकर कहा कि मुझे समझ नहीं आता कि चिंता क्यों होनी चाहिए. ताइवान में कई ऐसी बातें हैं जिन्हें लेकर वह चिंतित हैं, और उनकी स्थिति को देखते हुए यह सही भी है, लेकिन राष्ट्रपति की बातचीत मुख्यतः हमारे देशों के आकार और महत्व के कारण अमेरिका और चीन के बीच कूटनीतिक रूप से एक-दूसरे से जुड़े रहने की आवश्यकता के अलावा, व्यापार के मोर्चे पर भी रही है. उन्होंने कहा कि मुझे नहीं लगता कि आपको कोई ऐसा व्यापार समझौता देखने को मिलेगा, जहां लोगों को इस बात की चिंता हो कि हमें कोई ऐसा व्यापार समझौता मिलेगा या जहां ताइवान से अलग होने के बदले में हमें व्यापार को लेकर अनुकूल व्यवहार मिलेगा. ऐसा कोई नहीं सोच रहा है.

पाकिस्तान और अमेरिका के बीच बनते संबंधों और इससे भारत और अमेरिका पर पड़ने वाले प्रभाव और भारत और पाकिस्तान के संबंध को लेकर उन्होंने कहा कि हम जानते हैं कि वे स्पष्ट कारणों से चिंतित हैं क्योंकि पाकिस्तान और भारत के बीच ऐतिहासिक रूप से तनाव रहा है, लेकिन, मुझे लगता है कि उन्हें यह समझना होगा कि हमें कई अलग-अलग देशों के साथ संबंध रखने होंगे. अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि हम पाकिस्तान के साथ अपने रणनीतिक संबंधों का विस्तार करने का एक अवसर देखते हैं. यह हमारा काम है कि हम यह पता लगाने की कोशिश करें कि हम कितने देशों को ढूंढ सकते हैं जिनके साथ हम साझा हितों पर काम कर सकते हैं, इसलिए, जब कूटनीति और उस तरह की चीजों की बात आती है तो भारतीय बहुत परिपक्व हैं.

उन्होंने कहा कि भारत के कुछ ऐसे देशों के साथ संबंध हैं जिनके साथ हमारे संबंध नहीं हैं. इसलिए, यह एक परिपक्व, व्यावहारिक विदेश नीति का हिस्सा है. मुझे नहीं लगता कि हम पाकिस्तान के साथ जो कुछ भी कर रहे हैं वह भारत के साथ हमारे संबंधों या दोस्ती की कीमत पर है, जो गहरे, ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण हैं.

इनपुट- IANS

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