ईरान पर हमले से पीछे हटे ट्रंप! क्या खत्म होने जा रहा है तनाव? अमेरिकी राष्ट्रपति ने दिए शांति समझौते के संकेत
Iran US Conflict: डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर होने वाले नए हमले रद्द कर दिए हैं. जानिए शांति समझौते पर ताजा अपडेट क्या है?
ट्रंप के नए बयान से संकेत मिल रहे हैं कि दोनों देश बातचीत के रास्ते पर आगे बढ़ सकते हैं. (Photo from AI)
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा ऐलान किया है. उन्होंने ईरान पर होने वाले नए हवाई हमले और बमबारी को अगले आदेश तक रद्द कर दिया है. ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में कहा कि ईरान के साथ बातचीत अब उसके शीर्ष नेतृत्व स्तर तक पहुंच चुकी है और कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सहमति बन गई है. अमेरिकी राष्ट्रपति के मुताबिक अमेरिका, इजराइल, सऊदी अरब, UAE, कतर, तुर्किए, पाकिस्तान, बहरीन, कुवैत, जॉर्डन और मिस्र समेत कई देशों ने बातचीत के प्रमुख बिंदुओं को मंजूरी दे दी है. हालांकि, ट्रंप ने यह भी साफ किया कि अंतिम समझौता होने तक ईरान पर लगाया गया नौसैनिक नाकाबंदी (नेवल ब्लॉकेड) जारी रहेगा.
कुछ घंटों पहले दी थी बड़े हमले की चेतावनी
हैरान करने वाली बात यह है कि कुछ देर पहले ट्रंप ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा था कि अमेरिका उस पर बहुत बड़ा हमला करेगा. उन्होंने यह तक कहा था कि अमेरिका ईरान के प्रमुख तेल निर्यात केंद्र खार्ग द्वीप (Kharg Island) और अन्य ऊर्जा ढांचे पर नियंत्रण हासिल कर सकता है. ट्रंप का दावा था कि अगर समझौता नहीं हुआ, तो ईरान को और ज्यादा शक्तिशाली हमलों का सामना करना पड़ सकता है.
समझौते की दिशा में बढ़ते कदम
अब ट्रंप के नए बयान से संकेत मिल रहे हैं कि दोनों देश बातचीत के रास्ते पर आगे बढ़ सकते हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि समझौते पर विस्तार से चर्चा हो चुकी है और सभी संबंधित पक्षों ने उन्हें स्वीकार कर लिया है. उन्होंने यह भी बताया कि समझौते पर हस्ताक्षर कब और कहां होंगे, इसकी घोषणा जल्द की जाएगी. हालांकि, अंतिम दस्तावेज पर हस्ताक्षर होने तक अमेरिका अपनी नौसैनिक नाकाबंदी जारी रखेगा. इस कारण स्थिति पूरी तरह सामान्य होने में अभी कुछ समय लग सकता है.
ईरान-अमेरिका पर दुनिया भर की नजर
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह संभावित समझौता वास्तव में अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव को खत्म कर पाएगा?s ट्रंप के बयान से यह जरूर संकेत मिला है कि दोनों देशों के बीच बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है. अगर समझौता सफल रहता है, तो इससे न सिर्फ मिडिल ईस्ट (Middle East Tension) में शांति को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को भी राहत मिल सकती है.
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