ईरान में हो ही गया तख्तापलट! ट्रंप जिसे चाहते थे उसे नहीं मिली पावर, जानें कौन है नया राष्ट्रपति
रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के राष्ट्रपति पजशकियान और मुजतबा खामेनेई के बीच हाल के दिनों में कोई संपर्क नहीं हुआ है. पजशकियान ने कई बार सुप्रीम लीडर से मिलने की कोशिश की, लेकिन IRGC ने उनकी बात को नजरअंदाज कर दिया.
Updated Date:April 1, 2026 10:05 PM IST
By Anjali Karmakar Edited By Anjali Karmakar
इजरायल-अमेरिका ने मिलकर ईरान के खिलाफ 28 फरवरी से जंग छेड़ रखी है. अपने सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के बाद ईरान पूरी ताकत के साथ इस्लामिक सत्ता के अस्तित्व को बनाए रखने की लड़ाई लड़ रहा है. जंग को एक महीना हो चुका है. ईरान 6 महीने तक जंग के लिए तैयार रहने का दावा किया है. इस बीच वहां साइलेंट तख्तापलट की खबर आ रही है. तेहरान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान की ताकतवर सेना जैसी संस्था इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) और राष्ट्रपति मसूद पजशकियान के बीच सत्ता को लेकर खींचतान चल रही है. इसमें ट्विस्ट ये है कि ट्रंप ने जिसे ईरानी नेता बताया था, उसे पावर नहीं मिली है. ईरान के नए राष्ट्रपति के तौर पर कोई दूसरा नाम सामने आ रहा है.
तेहरान टाइम्स रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान में सरकार और धार्मिक सेना (IRGC) के बीच टकराव बढ़ गया है. IRGC ने देश का कंट्रोल अब अपने हाथ में ले लिया है. IRGC के चीफ-कमांडरल अहमद वाहिदी राष्ट्रपति के फैसले ले रहे हैं. रिपोर्ट में ये भी दावा किया गया है कि वाहिदी के आदेश के मुताबिक ही पजशकियान की मुलाकात सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई से नहीं हो पा रही है. ईरान की सत्ता के केंद्र में अब निर्वाचित सरकार नहीं, बल्कि वरिष्ठ IRGC अधिकारियों की एक मिलिट्री काउंसिल’ बैठ गई है. हालत ये है कि राष्ट्रपति पजशकियान पिछले गुरुवार को अपना नया खुफिया मंत्री नियुक्त करना चाहते थे, लेकिन IRGC के चीफ-कमांडरल अहमद वाहिदी ने इसे सीधे तौर पर ठुकरा दिया.
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कोई फैसले नहीं ले पा रहे पजशकियान
अखबार के मुताबिक, पजशकियान ने 26 मार्च को नया खुफिया मंत्री नियुक्त करने की कोशिश की थी. वे हुसैन देहगान को यह पद देना चाहते थे, लेकिन IRGC चीफ अहमद वहीदी ने इसे रोक दिया. वहीदी ने यह पद तब संभाला था, जब युद्ध की शुरुआत में पिछले कमांडर मोहम्मद पाकपुर मारे गए थे. वहीदी का कहना है कि युद्ध की स्थिति में सभी अहम और संवेदनशील पदों पर नियुक्ति IRGC ही करेगा और वही उन्हें संभालेगा.
डोनाल्ड ट्रंप ने किसे बताया था अपना करीबी?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर एक बड़ा दावा किया है. ट्रंप ने IRGC के चीफ-कमांडरल अहमद वाहिदी को नया ईरानी राष्ट्रपति बताया है. एक हफ्ते पहले भी ट्रंप ने ईरान के एक शख्स का नाम लिया था, जिसके साथ पूरी सीक्रेट डील’ होने का दावा किया गया था. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इस शख्स का नाम मोहम्मद-बाकर गालिबाफ है. ये ईरानी संसद के स्पीकर हैं. लेकिन, नए राष्ट्रपति के तौर पर गालिबाफ का नाम नहीं है.
ईरान में कितनी मजबूत है IRGC?
ईरान में सुप्रीम लीडर कौन है, इसे लेकर स्थिति साफ नहीं है. 28 फरवरी को जब जंग शुरू हुई उसी दिन अयातुल्लाह अली खामेनेई और कई बड़े नेता मारे गए थे. कुछ दिनों बाद खामेनेई के बेटे मुजतबा खामेनेई को सुप्रीम लीडर बनाया गया, लेकिन तब से वे न तो सामने आए हैं और न ही सीधे कोई बयान दिया है. उनके मैसेज सिर्फ टीवी पर पढ़कर सुनाए जा रहे हैं. अब IRGC के बड़े अधिकारियों की एक मिलिट्री काउंसिल’ रोज के फैसले ले रही है.
होर्मुज पर भी IRGC का कंट्रोल
IRGC की शुरुआत 1979 की क्रांति के बाद एक अर्धसैनिक बल के रूप में हुई थी, लेकिन समय के साथ यह बहुत ताकतवर बन गया. आज IRGC तेल, ट्रांसपोर्ट, बैंकिंग और रियल एस्टेट जैसे बड़े सेक्टर में भी काम करता है और अपनी कमाई से खुद को मजबूत बनाता है. अब होर्मुज जैसे अहम तेल मार्ग का नियंत्रण भी IRGC के पास है, जिसे ईरान ने प्रभावी रूप से बंद कर रखा है.
इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स को जानिए
इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स को ईरान में पासदारान कहा जाता है. 1970 में ईरानी इस्लामिक क्रांति के दौरान ये अस्तित्व में आया था. इसका मकसद इस्लामिक क्रांति को बचाना और सरकार की रक्षा करना था. IRGC ईरान की आम आर्मी से अलग है. ये सुप्रीम लीडर खामेनेई के आदेश पर काम करती है. ये फोर्स बॉर्डर पर तैनाती के अलावा देश के अंदर सरकार विरोधी आंदोलनों को भी दबाती है. IRGC में फिलहाल 1.25 लाख सैनिक हैं. इसमें रिजर्व फोर्स है, जिसे बसीज मिलिशिया कहा जाता है.
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Published Date:April 1, 2026 9:03 PM IST
Updated Date:April 1, 2026 10:05 PM IST