ट्रंप का दावा- ईरान के साथ खत्म हो गई जंग, अब कभी नहीं बनाएगा न्यूक्लियर हथियार, खामेनेई ने किया खारिज

Written By: Anjali Karmakar Updated by: Anjali Karmakar
Updated Date:June 12, 2026 5:47 PM IST

US-Israel-Iran War News: अमेरिकी प्रशासन इस बात पर विचार कर रहा है कि अगर खार्ग आइलैंड के तेल टर्मिनल को तबाह कर दिया जाए या उस पर कब्जा कर लिया जाए, तो ईरान की सबसे बड़ी इनकम बंद हो सकती है. ऐसा करके ईरान पर प्रेशर बनाया जा सकता है.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान को लेकर अपने बयान से फिर से पलट गए हैं. पहले उन्होंने कहा कि गुरुवार (11 जून 2026) की रात ईरान पर अब तक का सबसे बड़ा हमला होगा. रात होते-होते वो अपने बयान से पलट गए. ट्रंप ने कहा कि फिलहाल ईरान पर अटैक नहीं करेंगे. अब शुक्रवार (12 जून 2026) को अमेरिकी राष्ट्रपति ने सीधे जंग खत्म होने का ही दावा किया है.

Advertising
Advertising

वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका ने ईरान के साथ जंग खत्म कर दी है. उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान कभी परमाणु हथियार नहीं बनाएगा. एक वर्चुअल रैली में ट्रंप ने अपने समर्थकों से यह बात कही. हालांकि, ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई के मुताबिक, उनके देश ने अब तक कोई फैसला नहीं लिया है. पीस डील को लेकर अंतिम सहमति बननी बाकी है. वहीं, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघई ने भी कहा कि शांति समझौते पर अभी कोई आखिरी फैसला नहीं लिया गया है.

Explainer: होर्मुज छोड़ खार्ग को क्यों हथियाना चाहते हैं ट्रंप? क्या US कर सकता है वेनेजुएला जैसा अटैक? समझिए आज की रात ईरान पर कितनी भारी

रिपोर्ट के मुताबिक, इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में मीडिया ब्रीफिंग के दौरान कहा कि सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने नई डील को मंजूर कर लिया है. उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के साथ शांति समझौते पर इसी हफ्ते यूरोप में साइन किए जाएंगे. अगर सब कुछ ठीक रहा, तो उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भी इसमें शामिल होंगे. लेकिन, ईरान ने इन सारे दावों को सिरे से खारिज किया है.

ट्रंप के ईरान पर हमले न करने के फैसले से नेतन्याहू हैरान

दूसरी ओर, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से नाराज बताए जा रहे हैं. द संडे गार्डियन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान पर हमले को रोक देने के फैसले की जानकारी इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को पहले से नहीं दी गई थी. नाराजगी इसी बात को लेकर है.

रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप के सार्वजनिक बयान से पहले नेतन्याहू को कोई चेतावनी नहीं मिली. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि नेतन्याहू और इजरायली अधिकारी लगातार अमेरिका से ईरान पर सैन्य दबाव बनाए रखने की मांग कर रहे थे. उनका मानना था कि तेहरान बातचीत का इस्तेमाल समय हासिल करने के लिए कर रहा है.

ईरान की चेतावनी- हमें रोका तो किसी को नहीं मिलेगा तेल

ईरान ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि अगर उसके तेल और गैस ठिकानों पर हमला हुआ, तो होर्मुज स्ट्रेट पर ऐसी सुरक्षा लगाएंगे कि पूरे इलाके में तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हो सकती है. ईरानी सेना ने कहा कि या तो सभी देश तेल और गैस का कारोबार करेंगे, या फिर कोई भी नहीं कर पाएगा.

अमेरिका का दावा- होर्मुज स्ट्रेट पर जहाजों की आवाजाही जारी

ईरान की चेतावनी के बाद अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट अभी भी व्यापारिक जहाजों के लिए खुला है. वहां सुरक्षित रास्ते बनाए गए हैं. सेंटकॉम के मुताबिक, जो जहाज ईरान के खिलाफ लगाए गए अमेरिकी प्रतिबंधों का उल्लंघन नहीं कर रहे हैं, वे बिना किसी परेशानी के इस रास्ते से गुजर सकते हैं. अमेरिका ने दावा किया कि पिछले दो महीनों में सैकड़ों जहाज होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित होकर निकल चुके हैं.

जंग की आग में तड़प रहा ईरान, चावल 287% और दूध 139% तक हो गए महंगे, EMI पर आटा खरीद रहे ईरानी

कहां तक पहुंची US-ईरान की डील?

अभी की स्थिति में अमेरिका और ईरान के बीच डील लास्ट फेज में पहुंच चुकी है, लेकिन अभी उस पर साइन नहीं हुए हैं. दोनों पक्ष एक अंतरिम समझौता (Memorandum of Understanding - MOU) तैयार कर चुके हैं. कुछ अहम मुद्दों पर बातचीत जारी है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों पक्षों के बीच सबसे बड़ा पेच ईरान के सीज फंड को रिलीज करने और प्रतिबंधों में राहत को लेकर है.

डील के प्रमुख मुद्दे क्या हैं?

  • ईरान का न्यूक्लियर हथियार नहीं बनाने का वादा.
  • यूरेनियम एनरिचमेंट पर सख्त कंट्रोल.
  • अंतरराष्ट्रीय निगरानी बढ़ाई जाएगी.
  • होर्मुज स्ट्रेट को फिर से पूरी तरह खोला जाएगा.
  • बदले में ईरान को कुछ आर्थिक राहत और प्रतिबंधों में ढील मिलेगी.
  • अमेरिका ईरान को मुआवजा देगा.

डील में सबसे बड़ी बाधा क्या है?

अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम पर व्यापक प्रतिबंध स्वीकार करे. दूसरी ओर, ईरान चाहता है कि उस पर लगे आर्थिक प्रतिबंध हटाए जाएं और विदेशों में फंसी अरबों डॉलर की संपत्ति वापस मिले. डील पर अंतिम मुहर इन्हीं मुद्दों की वजह से नहीं लग पा रही है.

PM मोदी मेरे फेवरेट, हमारे बीच बहुत अच्छी अंडरस्टैंडिंग… भारत के साथ ट्रेड डील से पहले बोले ट्रंप

डील को लेकर इजरायल का क्या रूख?

इस बारे में इजरायल ने अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं. लेकिन, इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के हाल के बयानों से अंदाजा लगाया जा सकता है कि वो ईरान और अमेरिका के बीच कोई समझौता नहीं चाहते. इटली के प्रोफेसर लोरेन्जो कामेल ने न्यूज एजेंसी रॉयटर्स से कहा, “जब तक बेंजामिन नेतन्याहू सत्ता में हैं, तब तक अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत पूरी तरह सफल होना मुश्किल है. अक्टूबर में होने वाले इजरायली चुनाव तक नेतन्याहू युद्ध खत्म नहीं करना चाहेंगे. इसी वजह से हर कुछ दिनों या हफ्तों में हालात फिर बिगड़ सकते हैं.” कामेल के मुताबिक, नेतन्याहू खुद को संकट के समय सबसे जरूरी नेता के रूप में दिखाना चाहते हैं, इसलिए यह युद्ध उनके लिए राजनीतिक रूप से भी अहम है.

डील फाइनल, रूस से तेल नहीं खरीदेगा भारत, टैरिफ घटेंगे…’, मोदी और व्यापार समझौते पर क्या है ट्रंप का पूरा बयान

Add India.com as a Preferred Source

ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें फेसबुक पर लाइक करें या ट्विटर पर फॉलो करें. India.Com पर विस्तार से पढ़ें मनोरंजन की और अन्य ताजा-तरीन खबरें