सस्ता हो गया कच्चा तेल, पेट्रोल बेचने वाली कंपनियां तुरंत घटाए दाम...जंग भड़काने के बाद ट्रंप की दरियादिली!
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर कंपनियों ने जल्द दाम नहीं घटाए, तो उन्हें बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ेगा. इससे पहले ट्रंप अमेरिकी न्याय विभाग को बड़ी तेल कंपनियों की जांच के आदेश भी दे चुके हैं.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जंग खत्म करने को लेकर अब कतर में मीटिंग की बात कही है (ANI)
- होर्मुज से ईरान का होता है 90% तेल का निर्यात
- हर दिन गुजरता है 2.08 करोड़ बैरल कच्चा तेल
- ईरान जंग के बाद कच्चे तेल की सप्लाई पर लगी रोक
- अब तक US ने ईरान के खार्ग आईलैंड पर नहीं किया अटैक
अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच तनाव बढ़ने के बाद तेल की कीमतों में उछाल आया था. अब कच्चे तेल की कीमतें घट गई हैं, लेकिन पेट्रोल-डीजल अब भी महंगा बिक रहा है. अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पेट्रोल बेचने वाली कंपनियों से तुरंत पेट्रोल के दाम घटाने को कहा है. फोर्ब्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने कहा कि कच्चे तेल के दाम कम हो गए हैं. ऐसे में तेल कंपनियों को पेट्रोल के दाम भी घटाने होंगे. ट्रंप ने कहा कि लोग अब भी जरूरत से ज्यादा कीमत चुका रहे हैं, जबकि तेल लगातार सस्ता हो रहा है. ट्रंप ने कहा कि ग्राहकों से जरूरत से ज्यादा पैसे वसूलना गैरकानूनी है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर कच्चे तेल के दाम कम होने की जानकारी दी. ट्रंप ने लिखा, "कच्चे तेल की कीमत घटकर 68 डॉलर प्रति बैरल रह गई है, लेकिन इसका फायदा ग्राहकों तक नहीं पहुंच रहा है. कंपनियों को पेट्रोल की कीमत करीब 2.50 डॉलर प्रति गैलन तक ले जाना चाहिए."
ट्रंप ने अपने पोस्ट में कहा कि अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें अब भी जरूरत से ज्यादा बनी हुई हैं. जब तेल सस्ता हो चुका है, तो पेट्रोल पंपों पर भी कीमतों में उसी अनुपात में कमी दिखाई देनी चाहिए. उन्होंने रिटेलर्स से बिना देरी किए कीमतें घटाने की अपील करते हुए बड़े अक्षरों में लिखा, "LOWER THE PRICE OF GAS, NOW!"
'प्राइस गाउजिंग' का लगाया आरोप
राष्ट्रपति ट्रंप ने बिना किसी ठोस सबूत का हवाला दिए संकेत दिया कि पेट्रोल की मौजूदा ऊंची कीमतें 'प्राइस गाउजिंग' यानी संकट के समय अनुचित तरीके से कीमतें बढ़ाने का मामला हो सकती हैं. उन्होंने कहा कि अगर कंपनियां जानबूझकर ज्यादा कीमत वसूल रही हैं, तो यह पूरी तरह गैरकानूनी है. ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर कीमतें जल्द कम नहीं की गईं, तो संबंधित कंपनियों को बड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है.
2.50 डॉलर प्रति गैलन का रखा लक्ष्य
अपने पोस्ट में ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका में पेट्रोल की औसत कीमत करीब 2.50 डॉलर प्रति गैलन होनी चाहिए. यह लक्ष्य उस औसत कीमत से भी कम है, जो ईरान-इजरायल संघर्ष शुरू होने से पहले लगभग 2.93 डॉलर प्रति गैलन थी. यानी ट्रंप चाहते हैं कि पेट्रोल के दाम केवल पुराने स्तर पर ही न लौटें, बल्कि उससे भी नीचे आए.
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उपभोक्ताओं को राहत देने पर जोर
ट्रंप लगातार यह मैसेज देने की कोशिश कर रहे हैं कि ऊर्जा की कम कीमतें अमेरिकी अर्थव्यवस्था और आम नागरिकों के लिए बेहद जरूरी हैं. उनका कहना है कि सस्ता पेट्रोल परिवहन लागत कम करेगा, महंगाई पर दबाव घटाएगा और लोगों की जेब पर बोझ कम होगा. हालांकि, ट्रंप ने अपने आरोपों के समर्थन में कोई विशेष आंकड़े या सबूत पेश नहीं किए हैं.
कैसे घटे कच्चे तेल के दाम?
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 17 जून को अमेरिका और ईरान के बीच पीस डील पर साइन हुए. इसके बाद स्विट्जरलैंड में हुई मीटिंग में अमेरिका ने ईरानी तेल के निर्यात पर कुछ मामलों में बैन हटा लिया. इसके बाद होर्मुज रूट से गुजरने वाले जहाज की संख्या बढ़ने लगी. इसके चलते कच्चे तेल के दाम कम होने लग.
ईरान युद्ध से पहले कच्चे तेल की जो कीमतें थीं, 26 जून को वैश्विक बाजार में दाम उसी स्तर पर आ गए. बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड ऑयल 72 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया. यह वही भाव (72.29 डॉलर) है, जो युद्ध शुरू होने से एक दिन पहले 27 फरवरी 2026 को था.
होर्मुज से गुजरे कितने जहाज?
सोमवार (29 जून) तक करीब 80 जहाज होर्मुज स्ट्रेट पार कर चुके हैं.हालांकि, यह संख्या युद्ध से पहले रोजाना 100 से ज्यादा जहाजों से कम है.
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