ट्रंप का ईरान को साफ संदेश! समझौते से पहले नहीं हटेंगे प्रतिबंध, अरबों डॉलर भी रहेंगे बंद
Donald Trump Iran Deal: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ किया है कि ईरान के साथ अंतिम समझौता होने तक न तो बैन हटाए जाएंगे और न ही उसकी जमी हुई संपत्तियां जारी होंगी. उन्होंने ये भी कहा कि लेबनान को किसी संभावित समझौते का हिस्सा बनाना जरूरी नहीं है.
US-Iran Relations: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के रिश्ते एक बार फिर वैश्विक चर्चा का विषय बन गए हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कर दिया है कि जब तक ईरान के साथ कोई ठोस और अंतिम समझौता नहीं हो जाता, तब तक अमेरिका उसकी जमी हुई संपत्तियों को जारी नहीं करेगा और आर्थिक प्रतिबंधों में भी कोई ढील नहीं दी जाएगी.
एक टेलीविजन इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि ईरान को किसी भी तरह की आर्थिक राहत तभी मिलेगी, जब वो समझौते की शर्तों को स्वीकार करने के साथ-साथ उनका पालन भी करेगा. उन्होंने संकेत दिया कि बातचीत जारी है, लेकिन फिलहाल अमेरिका अपनी सख्त नीति में कोई बदलाव करने के मूड में नहीं है.
लेबनान और ईरान के रिश्ते
ट्रंप ने ये भी साफ किया कि संभावित समझौते में लेबनान को शामिल करना उनकी प्राथमिकता नहीं है. हालांकि, उन्होंने माना कि कुछ पक्ष ऐसा चाहते हैं, लेकिन अमेरिका इस मुद्दे को किसी शर्त के रूप में नहीं देख रहा. उनके इस बयान को क्षेत्रीय कूटनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि लेबनान और ईरान के बीच लंबे समय से रणनीतिक रिश्ते रहे हैं.
अमेरिकी राष्ट्रपति ने जोर देकर कहा कि भविष्य में होने वाला कोई भी समझौता केवल परमाणु हथियारों के विकास को रोकने तक सीमित नहीं होना चाहिए. उनका कहना है कि समझौते में ऐसे प्रावधान भी होने चाहिए, जो ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने, खरीदने या किसी भी रूप में हासिल करने से पूरी तरह रोकें.
ट्रंप के अनुसार, बातचीत के दौरान कुछ बिंदुओं पर सहमति बन चुकी है, लेकिन अभी भी कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा जारी है. उन्होंने दावा किया कि ईरानी प्रतिनिधियों ने शुरुआत में कुछ प्रस्तावों का विरोध किया था, लेकिन बाद में उनके रुख में नरमी देखने को मिली.
अगर डील होगी तो क्या होगा?
इस बीच ट्रंप ने ये भी संकेत दिया कि अगर बातचीत विफल होती है, तो अमेरिका सैन्य विकल्प अपनाने से पीछे नहीं हटेगा. उन्होंने कहा कि अगर समझौता हो जाता है तो दोनों देश मिलकर संवर्धित यूरेनियम के भंडार को नष्ट करने की प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं, लेकिन अगर समझौता नहीं हुआ तो अमेरिका अपनी सुरक्षा और रणनीतिक हितों की रक्षा के लिए कठोर कदम उठाने को तैयार है.
अमेरिका और ईरान के बीच जारी ये कूटनीतिक खींचतान केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर पूरे मध्य पूर्व की सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर भी पड़ सकता है. ऐसे में आने वाले हफ्ते बेहद अहम माने जा रहे हैं, क्योंकि यही तय करेंगे कि बातचीत समझौते तक पहुंचती है या क्षेत्र में तनाव और बढ़ता है.
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