
Anjali Karmakar
अंजलि कर्मकार 12 साल से जर्नलिज्म की फील्ड में एक्टिव हैं. उन्होंने बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स में ग्रेजुएशन किया है. यहीं से मास कॉम में मास्टर्स की डिग्री ली ... और पढ़ें
इस साल के लिए शांति के नोबेल प्राइज का ऐलान हो चुका है. वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया मचाडो (María Corina Machado)को साल 2025 का शांति का नोबेल पुरस्कार (Nobel Peace Prize 2025) मिला है. मचाडो वेनेजुएला में 2 दशक से लोकतांत्रिक अधिकारों को बढ़ावा देने और तानाशाही से लोकतंत्र की ओर शांतिपूर्ण बदलाव लाने के लिए संघर्ष कर रही हैं. वह एक साल से भी ज्यादा वक्त से देश में ही छुपकर रह रही हैं. शांति के नोबेल के लिए मचाडो के नाम के ऐलान के साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) का गुरूर भी टूट गया. ट्रंप बीते कई महीनों से 8 युद्धों को रोकने का दावा करते हुए खुद को शांति का नोबेल देने की वकालत कर रहे थे. इसमें पहलगाम हमले के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़े गतिरोध को बढ़ने से रोकने का दावा शामिल है. पाकिस्तान, इजराइल, अर्मेनिया, अजरबैजान, कंबोडिया और रवांडा ने ट्रंप को शांति का नोबेल देने के लिए अपना समर्थन जताया था. हालांकि, नोबेल कमेटी ने इस पुरस्कार के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति के नाम पर मुहर नहीं लगाई.
कौन हैं मारिया मचाडो
नोबेल कमिटी ने मारिया के लिए क्या कहा?
नोबेल कमिटी ने मारिया के लिए कहा, “वेनेजुएला में तानाशाही शासन के कारण राजनीतिक काम करना बहुत मुश्किल है. मचाडो ने सुमाते नाम के संगठन की स्थापना की. ये संगठन लोकतंत्र की बेहतरी के लिए काम करता है. वे देश में मुफ्त और निष्पक्ष चुनावों की मांग करती रही हैं.“
मचाडो ने ऐसे तोड़ा ट्रंप का गुरूर
नोबेल कमिटी ने माचाडो को शांति का नोबेल देने की 3 वजहें भी बताईं. इसके साथ ही साफ हो गया कि आखिर ट्रंप को मांगने पर भी क्यों ये प्राइज नहीं दिया गया. अप्रत्यक्ष रूप से ही सही मचाडो ने अपनी काबिलिय के दम पर ट्रंप का गुरूर तोड़ दिया है. नोबेल कमिटी ने बताया, “मचाडो नोबेल पीस प्राइज के लिए तीनों पैरामीटर्स पर खरी उतरी हैं. उन्होंने विपक्ष को एकजुट किया, सैन्यकरण के खिलाफ लगातार खड़ी रहीं और लोकतंत्र को समर्थन दिया.“ कमिटी ने आगे कहा, “मचाडो ने लोकतंत्र में ऐसे भविष्य की उम्मीद जगाई है जहां नागरिकों के मूल अधिकार सुरक्षित हों और उनकी आवाज सुनी जाए.” ट्रंप भी माचाडो को स्वतंत्रता सेनानी कह चुके हैं.
मारिया को नोबेल पुरस्कार के तौर पर क्या-क्या मिलेगा?
शांति के नोबेल विजेता मारिया मचाडो को 10 दिसंबर को ओस्लो में दिए ये पुरस्कार दिया जाएगा. उन्होंने नोबेल पुरस्कार के तौर पर 11 मिलियन स्वीडिश क्रोना (10.3 करोड़ रुपये), सोने का मेडल और सर्टिफिकेट मिलेगा.
नोबेल से पहले मचाडो को मिल चुके ये पुरस्कार
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