कौन हैं मारिया मचाडो, जिन्हें मिला शांति का नोबेल प्राइज, ऐसे तोड़ा डोनाल्ड ट्रंप का गुरूर

Who is Maria Corina Machado: मारिया मचाडो ने वेनेजुएला में लोकतांत्रिक अधिकारों को बढ़ावा देने और तानाशाही से लोकतंत्र की ओर शांतिपूर्ण बदलाव लाने के लिए लगातार संघर्ष किया है. फिलहाल वो वेनेजुएला में विपक्ष की नेता हैं.

Published date india.com Updated: October 10, 2025 4:31 PM IST
कौन हैं मारिया मचाडो, जिन्हें मिला शांति का नोबेल प्राइज, ऐसे तोड़ा डोनाल्ड ट्रंप का गुरूर
मारिया मचाडो को वेनेजुएला की ‘आयरन लेडी’ कहा जाता है.

इस साल के लिए शांति के नोबेल प्राइज का ऐलान हो चुका है. वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया मचाडो (María Corina Machado)को साल 2025 का शांति का नोबेल पुरस्कार (Nobel Peace Prize 2025) मिला है. मचाडो वेनेजुएला में 2 दशक से लोकतांत्रिक अधिकारों को बढ़ावा देने और तानाशाही से लोकतंत्र की ओर शांतिपूर्ण बदलाव लाने के लिए संघर्ष कर रही हैं. वह एक साल से भी ज्यादा वक्त से देश में ही छुपकर रह रही हैं. शांति के नोबेल के लिए मचाडो के नाम के ऐलान के साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) का गुरूर भी टूट गया. ट्रंप बीते कई महीनों से 8 युद्धों को रोकने का दावा करते हुए खुद को शांति का नोबेल देने की वकालत कर रहे थे. इसमें पहलगाम हमले के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़े गतिरोध को बढ़ने से रोकने का दावा शामिल है.  पाकिस्तान, इजराइल, अर्मेनिया, अजरबैजान, कंबोडिया और रवांडा ने ट्रंप को शांति का नोबेल देने के लिए अपना समर्थन जताया था. हालांकि, नोबेल कमेटी ने इस पुरस्कार के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति के नाम पर मुहर नहीं लगाई.

कौन हैं मारिया मचाडो

  • मारिया मचाडो को पूरा नाम मारिया कोरिना मचाडो है. उन्हें वेनेजुएला की ‘आयरन लेडी’ कहा जाता है. उनका जन्म 7 अक्टूबर 1967 में हुआ. वह टोरो के तीसरे मार्क्विस की वंशज हैं.
  • मचाडो ने एंड्रेस बेलो कैथोलिक यूनिवर्सिटी से औद्योगिक इंजीनियरिंग में डिग्री ली है. इसके साथ ही कराकास स्थित इंस्टीट्यूटो डी एस्टुडियोस सुपीरियरेस डी एडमिनिस्ट्रेशन (IESA, बिज़नेस स्कूल) से फाइनेंस में मास्टर डिग्री हासिल की है. वह 2009 में येल यूनिवर्सिटी के वर्ल्ड फ़ेलो प्रोग्राम का भी हिस्सा रह चुकी हैं.
  • मचाडो ने साल 1990 में रिकार्डो सोसा से शादी की थी. कपल के 3 बच्चे हुए. 2001 में दोनों का डिवोर्स हो गया.
  • मचाडो ने फंडासिओन एटेनिया (एटेनिया फाउंडेशन) की शुरुआत की. ये अनाथ और अपराधी कराकास स्ट्रीट बच्चों की देखभाल के लिए प्राइवेट डोनेशन का इस्तेमाल करती है. वह ऑपर्चुनिटास फाउंडेशन की अध्यक्ष के तौर पर भी काम कर चुकी हैं.
  • उन्होंने पूरे वेनेजुएला में लोगों को लोकतंत्र की रक्षा और तानाशाही के खिलाफ एकजुट करने का काम किया है. ताकि, देश के तानाशाह राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को चुनाव में हार मिले. मादुरो 2013 से वेनेजुएला के 53वें राष्ट्रपति के रूप में कार्यरत हैं.
  • मचाडो 2024 के चुनाव में विपक्ष की तरफ से राष्ट्रपति की उम्मीदवार थीं, लेकिन वेनेजुएला की मौजूदा मादुरो सरकार ने उनकी उम्मीदवारी ही रद्द कर दी थी.
  • इसके बाद उन्होंने दूसरे पार्टी के प्रतिनिधि एडमंडो गोंजालेज उर्रुतिया का समर्थन किया. उर्रुतिया के नाम पर दूसरे देशों ने भी अपना समर्थन जताया था.
  • 2024 के इलेक्शन में मचाडो के समर्थक पार्टी को जीत मिली थी, लेकिन मादुरो ने चुनाव के नतीजे स्वीकार नहीं किए. फिलहाल वह वेनेजुएला की सत्ता में कब्जा जमाए हुए हैं.
  • मचाडो दुनिया में पहली बार तब सुर्खियों में आईं, जब उन्होंने वेनेजुएला के तत्कालीन राष्ट्रपति ह्यूगो शावेज़ का भाषण बंद करा दिया था. यह घटना 14 जनवरी 2012 की है. शावेज संसद में 9 घंटे 45 मिनट का भाषण दे चुके थे.
  • तभी मचाडो ने चिल्लाते हुए उन्हें ‘चोर’ कहा. उन्होंने शावेज़ पर नागरिकों की संपति जब्त करने का आरोप लगाते हुए इसे लौटाने को कहा. इसके जवाब में शावेज ने कहा कि ऐसी अशांति के माहौल में वो कुछ नहीं बोलेंगे. बस इसके बाद शावेज स्टेज से चले गए थे.

नोबेल कमिटी ने मारिया के लिए क्या कहा?
नोबेल कमिटी ने मारिया के लिए कहा, वेनेजुएला में तानाशाही शासन के कारण राजनीतिक काम करना बहुत मुश्किल है. मचाडो ने सुमाते नाम के संगठन की स्थापना की. ये संगठन लोकतंत्र की बेहतरी के लिए काम करता है. वे देश में मुफ्त और निष्पक्ष चुनावों की मांग करती रही हैं.

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मचाडो ने ऐसे तोड़ा ट्रंप का गुरूर
नोबेल कमिटी ने माचाडो को शांति का नोबेल देने की 3 वजहें भी बताईं. इसके साथ ही साफ हो गया कि आखिर ट्रंप को मांगने पर भी क्यों ये प्राइज नहीं दिया गया. अप्रत्यक्ष रूप से ही सही मचाडो ने अपनी काबिलिय के दम पर ट्रंप का गुरूर तोड़ दिया है. नोबेल कमिटी ने बताया, मचाडो नोबेल पीस प्राइज के लिए तीनों पैरामीटर्स पर खरी उतरी हैं. उन्होंने विपक्ष को एकजुट किया, सैन्यकरण के खिलाफ लगातार खड़ी रहीं और लोकतंत्र को समर्थन दिया. कमिटी ने आगे कहा, मचाडो ने लोकतंत्र में ऐसे भविष्य की उम्मीद जगाई है जहां नागरिकों के मूल अधिकार सुरक्षित हों और उनकी आवाज सुनी जाए.ट्रंप भी माचाडो को स्वतंत्रता सेनानी कह चुके हैं.

मारिया को नोबेल पुरस्कार के तौर पर क्या-क्या मिलेगा?
शांति के नोबेल विजेता मारिया मचाडो को 10 दिसंबर को ओस्लो में दिए ये पुरस्कार दिया जाएगा. उन्होंने नोबेल पुरस्कार के तौर पर 11 मिलियन स्वीडिश क्रोना (10.3 करोड़ रुपये), सोने का मेडल और सर्टिफिकेट मिलेगा.

नोबेल से पहले मचाडो को मिल चुके ये पुरस्कार

  • जेनेवा समिट फॉर ह्यूमन राइट्स ने मारिया मचाडो और एडमुंडो गोंजालेज को 2025 का करेज अवॉर्ड दिया था.
  • 2024 में यूरोपीय संसद ने मचाडो और एडमुंडो गोंजालेज को लोकतंत्र की रक्षा के लिए सखारोव पुरस्कार से सम्मानित किया था.
  • 2024 में ही काउंसिल ऑफ यूरोप ने मचाडो को ह्यूमन राइट्स की रक्षा के लिए काम करने पर वाच्लाव हावेल मानवाधिकार पुरस्कार से सम्मानित किया था.
  • BBC ने मारिया मचाडो को साल 2018 में दुनिया की 100 सबसे प्रभावशाली महिलाओं में शामिल किया था.

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