
Anjali Karmakar
अंजलि कर्मकार 12 साल से जर्नलिज्म की फील्ड में एक्टिव हैं. उन्होंने बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स में ग्रेजुएशन किया है. यहीं से मास कॉम में मास्टर्स की डिग्री ली ... और पढ़ें
अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल 40 दिन से चल रही जंग पर फिलहाल के लिए ब्रेक लगा है. ईरान और अमेरिका के बीच बुधवार (8 अप्रैल) को 2 हफ्ते के सीजफायर पर सहमति बन गई है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मुताबिक, सीजफायर का ये फैसला पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और पाकिस्तानी आर्मी चीफ की अपील के बाद लिया गया है.
सीजफायर से पहले ट्रंप ने ईरान को पूरी सभ्यता को खत्म करने की धमकी दी थी. आखिरी समय पर चीन के दखल के बाद ईरान ने 10 शर्तों के साथ सीजफायर पर सहमति दी है. अब आगे की बातचीत पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में हो सकती है. अमेरिका के साथ समझौता करने के लिए मोहम्मद बगेर गालिबफ ईरान को रिप्रेजेंट करेंगे. इन्हें ट्रंप की पसंद भी बताया जा रहा है.
आइए जानते हैं कौन हैं मोहम्मद बगेर गालिबफ? ये कैसे बने डोनाल्ड ट्रंप के पसंदीदा शख्स? ईरान में इनका ओहदा इतना अहम कैसे हो गया?
ईरान के स्पीकर हैं मोहम्मद बगेर गालिबफ
मोहम्मद बगेर गालिबफ एक रूढ़िवादी ईरानी राजनेता हैं. उनका आर्मी का बैकग्राउंड है. वह मई 2020 से ईरान की संसद के स्पीकर हैं. 1961 में जन्मे गालिबफ 1980 में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) में शामिल हुए. ईरान-इराक युद्ध के दौरान वह इसके कमांडरों में से एक बन गए.
सेना से सियासत तक का सफर
गालिबफ का करियर सिर्फ सेना तक सीमित नहीं रहा. उन्होंने कई अहम प्रशासनिक और राजनीतिक पद भी संभाले हैं. 1997 से 2000 तक वह IRGC के एयरोस्पेस डिवीजन के हेड रहे. 2000 से 2005 तक गालिबफ ईरानी पुलिस के हेड थे. 2005 से 2017 तक उन्होंने तेहरान के मेयर की जिम्मेदारी बखूबी संभाली. 2020 से अब तक संसद के स्पीकर बने हुए है.
4 बार लड़ चुके ईरानी राष्ट्रपति का चुनाव
मोहम्मद बगेर गालिबफ 4 बार ईरान के राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ चुके हैं. एक बार भी उन्हें जीत नहीं मिली. 2005 में हुए इलेक्शन में वो चौथे नंबर पर रहे थे. 2013 में दूसरे स्थान पर रहे. 2017 में उन्होंने चुनाव से पहले ही अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली थी. 2024 में हुए राष्ट्रपति चुनाव में गालिबफ थर्ड पोजिशन पर रहे थे. चुनाव अभियानों के दौरान उन्होंने खुद को एक आधुनिक और विकासवादी नेता के रूप में पेश करने की कोशिश की है.
विवादों से रहा है पुराना नाता
गालिबफ का राजनीतिक करियर विवादों से अछूता नहीं रहा है. यास होल्डिंग घोटाला, लेयेटगेट विवाद (परिवार की लग्जरी यात्रा) इसके अलावा 1999 में छात्र विरोध प्रदर्शनों के दौरान कड़े दमनात्मक रुख के कारण भी उनका नाम चर्चा में रहा.
ट्रंप के बयान से मिली चर्चा
हाल ही में अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के साथ चल रहे तनाव के बीच दावा किया कि उन्होंने ईरान के एक टॉप ऑफिसर से बातचीत की है. ट्रंप ने इस ऑफिसर का नाम तो नहीं बताया, लेकिन इंटरनेशनल मीडिया रिपोर्ट्स में कयास लगाए गए कि यह व्यक्ति मोहम्मद बगेर गालिबफ हो सकते हैं. एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी प्रशासन उन्हें संभावित ईरान के भविष्य के नेता के रूप में देख रहा है.
कैसे बने ट्रंप के फेवरेट?
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ईरान के अंदर ऐसे नेताओं की तलाश में है, जो भविष्य में सत्ता संभाल सकते हैं. ऐसे लोग जिन्हें आर्मी और एडमिनिस्ट्रेशन की जानकारी हो. गालिबफ इसमें पहले नंबर पर आते हैं. ट्रंप ने अपने बयान में ये भी कहा था, “ईरान में कुछ समझदार और मजबूत लोग हैं. ये चाहें तो ईरान में बड़े बदलाव हो सकते हैं.” यही वजह है ट्रंप गालिबफ को अपना फेवरेट मानते हैं.
गालिबफ पर ईरान की प्रतिक्रिया
ईरान ने इन सभी दावों को खारिज करते हुए अमेरिका और इजरायल पर आरोप लगाया कि वे झूठी खबरों के जरिए दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं. गालिबफ ने कहा कि ईरान मानवता के लिए लड़ रहा है. उनका देश किसी भी बाहरी दबाव के सामने झुकने वाला नहीं है.
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