वॉशिंगटन। आतंकवाद से लड़ाई को लेकर पाकिस्तान चाहे लाख दावे और वादे करे लेकिन अमेरिका को उस पर यकीन करना मुश्किल हो रहा है. अमेरिका ने एक बार फिर आतंकवाद से लड़ाई में पाकिस्तान की प्रतिबद्धता पर सवाल उठाए हैं. व्हाइट हाउस ने आज साफ कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में पाकिस्तान की ओर से की गई प्रगति से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप संतुष्ट नहीं हैं और अमेरिका पहली बार इस्लामाबाद को उसकी हरकतों के लिए जवाबदेह ठहरा रहा है.

पेरिस में वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (एफएटीएफ) की मौजूदा बैठक के बीच व्हाइट हाउस के डिप्टी प्रेस सचिव राज शाह ने पाकिस्तान पर ये टिप्पणी की. एफएटीएफ की बैठक में अमेरिका, पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय आतंक-वित्तपोषण निगरानी सूची में डालने के प्रयासों का नेतृत्व कर रहा है. हालांकि अमेरिका के प्रयासों पर चीन, सऊदी अरब और तुर्की ने अड़ंगा लगाया है. अपने अपने हितों के चलते तीनों देश नहीं चाहते कि पाकिस्तान को ऐसी किसी निगरानी सूची में डाला जाए.

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राज शाह ने पत्रकारों को बताया कि मैं जानता हूं कि पाकिस्तान के साथ अपने रिश्ते में हम कुछ स्पष्टता लाए हैं. पहली बार हम पाकिस्तान को उसकी हरकतों के लिए जवाबदेह ठहरा रहे हैं. राष्ट्रपति की दक्षिण एशिया नीति में हुई प्रगति के बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में शाह ने कहा कि इन चिंताओं को वास्तविक रूप में मानने के मामले में हमने पाकिस्तान की ओर से ठीक-ठाक प्रगति देखी है, लेकिन बात जब पाकिस्तान की आती है तो राष्ट्रपति इस प्रगति से संतुष्ट नहीं हैं. ट्रंप प्रशासन ने पिछले साल अगस्त में दक्षिण एशिया नीति की घोषणा की थी. इस नीति की घोषणा के वक्त ट्रंप ने पाकिस्तान पर आरोप लगाया था कि वह आतंकवादी संगठनों को पाल-पोस रहा है और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में पाकिस्तान को और ज्यादा कदम उठाने को कहा था.

अमेरिकी प्रयासों पर फिरा पानी

वॉल स्ट्रीट जर्नल में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक तीन देशों चीन, सऊदी अरब और तुर्की ने पाकिस्तान को फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की सूची में डालने के अमेरिकी प्रयास पर पानी फेर दिया. अगर प्रस्ताव पास हो जाता तो पाकिस्तान को जबरदस्त आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता. वॉल स्ट्रीट जर्नल ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि अमेरिका और अरब में उसके करीबी सहयोगी सऊदी अरब के बीच कम ही मौकों पर ऐसी असहमति नजर आई है. अरब में अमेरिका, सऊदी अरब का प्रमुख सहयोगी है. हालांकि, इस बार अखबार ने लिखा है कि सऊदी ने गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC)की ओर से इस तरह का फैसला लिया है.

(भाषा इनपुट)