अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्यापार पर चीन से कोई रियायत नहीं मिलने की स्थिति में ‘वन चाइना’ नीति की निरंतरता की प्रासंगिकता पर रविवार को सवाल उठाया और कहा कि यह कम्युनिस्ट देश उन पर हुक्म नहीं चला सकता। अमेरिका ने 1979 से ही ताईवान पर चीन के रूख का सम्मान किया है। जिसे चीन अपने से अलग हुआ प्रांत मानता है। लेकिन ट्रंप ने कहा कि चीन से रियायत नहीं मिलने पर उन्हें यह नजर नहीं आता कि इसे जारी क्यों रखा जाए।

वही दूसरी तरफ ट्रंप ने हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में डेमोक्रेटिक प्रतिद्वंद्वी हिलेरी क्लिंटन के खिलाफ कड़े मुकाबले में उन्हें रूस द्वारा मदद पहुंचाने संबंधी सीआईए के कथित आकलन को ‘बकवास’ करार दिया। ट्रंप ने फॉक्स न्यूज से कहा कि यह दावा हिलेरी के खिलाफ उनकी भारी जीत के संदर्भ में डेमोक्रेटों का एक बहाना है। उन्होंने कहा, ‘यह बस एक दूसरा बहाना है। मैं इस पर यकीन नहीं करता। हर हफ्ते एक नया बहाना आ जाता है। जैसा कि आप जानते हैं कि निर्वाचक मंडल में हमारी भारी जीत हुई थी। यह भी पढ़े-अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बने 2016 के ‘टाइम पर्सन ऑफ द इयर’

डोनाल्ड ट्रंप ने फोक्स न्यूज से कहा, ‘‘मैं वन चाइना पॉलिसी पूरी तरह समझता हूं। लेकिन मुझे नहीं मालूम कि यदि हम व्यापार समेत अन्य चीजें करने के लिए चीन के साथ सौदा नहीं कर पाते है तो हम वन चाइना पॉलिसी से क्यों बंधे हैं। उन्होंने कहा, ‘‘दक्षिण चीन सागर के मध्य में विशाल किला बनाकर और अवमूल्यन और सीमा पर हमारे ऊपर भारी कर लगा कर चीन हम पर बुरी तरह चोट पहुंचा रहा है जबकि हम उन पर कर नहीं लगाते। चीन को ऐसा नहीं करना चाहिए।

ट्रंप ने कहा, ‘‘स्पष्ट कहूं तो वह उत्तर कोरिया मामले में हमारी मदद नहीं कर रहा। आप उत्तर कोरिया के समीप हैं, आपके पास परमाणु हथियार हैं और चीन उस समस्या का हल कर सकता था. वह हमारी बिल्कुल मदद नहीं कर रहा। इसलिए मैं नहीं चाहता कि चीन मुझपर हुक्म चलाए.’’ ताईवान के राष्ट्रपति से उन्हें बधाई फोन आने पर चीन में नाराजगी के संबंध में सवाल पूछे जाने पर उन्होंने (ताईवानी राष्ट्रपति) साई इंग-वेन के साथ बातचीत का बचाव किया।