ट्रंप को हो रहा भारत पर टैरिफ का पछतावा? बोले - आसान नहीं था ये फैसला, दांव पर लगा दी दोस्ती

ट्रंप ने कहा कि भारत पर 50% टैरीफ लगाया क्योंकि वह रूस से तेल खरीद रहा है. इस कदम से भारत और अमेरिका रिश्तों में मतभेद बढ़ गए हैं. जानिए उन्होंने और क्या-क्या कहा?

Published date india.com Published: September 12, 2025 11:04 PM IST
ट्रंप को हो रहा भारत पर टैरिफ का पछतावा? बोले - आसान नहीं था ये फैसला, दांव पर लगा दी दोस्ती

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ‘फॉक्स एंड फ्रेंड्स’ को दिए एक इंटरव्यू में भारत को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा रूस से तेल खरीदने पर भारत पर 50% का टैरिफ लगाया था. ट्रंप का अब मानना है कि यह आसान कदम नहीं था. क्योंकि इससे अमेरिका और भारत के रिश्तों में तनाव बढ़ा. उनका कहना था कि रूस का सबसे बड़ा तेल ग्राहक भारत है और इसे रोकने के लिए उन्होंने कड़े आर्थिक कदम उठाए. यह बयान उस समय आया है, जब दुनिया ऊर्जा संकट और भू-राजनीतिक तनावों से गुजर रही है.

रूस पर दबाव बनाने की कोशिश की थी

ट्रंप ने इंटरव्यू में यह भी कहा कि रूस से तेल खरीदने का मुद्दा अमेरिका की तुलना में यूरोप के लिए कहीं ज्यादा गंभीर है. उन्होंने साफ किया कि उनका ध्यान हमेशा यूरोप को इस संकट से बचाने पर रहा. ट्रंप का कहना है कि उन्होंने पहले ही कई कदम उठाकर रूस पर दबाव बनाने की कोशिश की थी. वहीं, भारत का पक्ष हमेशा से यही रहा है कि उसकी ऊर्जा नीति पूरी तरह से राष्ट्रीय हित और बाजार की स्थिति पर आधारित है. भारत ने बार-बार यह कहा है कि तेल खरीदना उसका संप्रभु अधिकार है, और वह इसे किसी बाहरी दबाव से प्रभावित होकर तय नहीं करेगा.

ट्रंप ने फिर किए युद्ध सुलझाने के दावे

इंटरव्यू के दौरान ट्रंप ने यह दावा भी किया कि अपने राष्ट्रपति कार्यकाल में उन्होंने 7 बड़े युद्ध सुलझाए. उन्होंने पाकिस्तान और भारत के बीच तनाव से लेकर अफ्रीकी देशों जैसे कांगो और रवांडा के संघर्षों का जिक्र किया. ट्रंप का कहना है कि उन्होंने ऐसे विवाद भी खत्म किए, जो दशकों से अनसुलझे थे. हालांकि, भारत ने ट्रंप के इस दावे को हमेशा खारिज किया. भारत का कहना है कि पाकिस्तान के साथ संघर्ष विराम केवल डीजीएमओ स्तर की बातचीत के जरिए हुआ था, और इसमें किसी तीसरे देश की भूमिका नहीं थी.

टैरिफ पर क्या थी भारत की प्रतिक्रिया?

भारत की ओर से 50% टैरिफ पर कहा गया कि ऊर्जा की जरूरतें और राष्ट्रीय हित उसकी प्राथमिकता हैं. भारत ने यह भी दोहराया है कि रूस से तेल खरीदना किसी अंतरराष्ट्रीय नियम का उल्लंघन नहीं है, बल्कि यह उसकी अर्थव्यवस्था और नागरिकों के हित में है.

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