ये बेवकूफी भरा कदम... होर्मुज में जहाजों पर ड्रोन हमले से भड़के ट्रंप, ईरान के दे डाली ये नसीहत
होर्मुज स्ट्रेट में एक कॉमर्शियल जहाज पर किसी अज्ञात प्रोजेक्टाइल यानी हमलावर हथियार से अटैक हुआ. ब्रिटेन की यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस ने इसकी जानकारी शेयर की है.
ट्रंप सरकार ने युद्ध खर्च के लिए अमेरिकी संसद से 87.6 अरब डॉलर यानी करीब 8.322 लाख करोड़ की अतिरिक्त फंडिंग मांगी है. (ANI)
अमेरिका और ईरान के बीच हुई पीस डील पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर सीजफायर समझौते के उल्लंघन का आरोप लगाया है. न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों पर हमला किया है. अमेरिकी राष्ट्रपति के मुताबिक, ईरान ने एक कमर्शियल जहाज पर कम से कम 4 ड्रोन दागे. इनमें से 3 को तो रोक लिया गया. एक ड्रोन जहाज से टकरा गया.इस हमले में जहाज को नुकसान पहुंचा, लेकिन वह होर्मुज पार करने में कामयाब रहा. ट्रंप ने इस हमले को 'सीजफायर का मूर्खतापूर्ण उल्लंघन' करार दिया है. ट्रंप ने ईरान के नसीहत देते हुए कहा कि सीजफायर की शर्तों को बनाए रखना उसकी सेहत के लिए अच्छा होगा.
ट्रंप ने क्या कहा?
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते के बाद क्षेत्र में शांति बहाल होने की उम्मीद थी, लेकिन ईरान की यह कार्रवाई बेहद गैर-जिम्मेदाराना है. उन्होंने कहा कि 4 'वन-वे अटैक ड्रोन' जहाजों की ओर भेजे गए. इनमें से एक ने एक कार्गो शिप के ऊपरी हिस्से को नुकसान पहुंचाया. ट्रंप ने कहा कि सीजफायर तोड़ना बहुत बड़ी गलती है. यह दोनों देशों के बीच हुए सीजफायर समझौते का सीधा उल्लंघन है.
वहीं, ब्रिटिश सेना ने गुरुवार (25 जून 2026) को बताया था कि ओमान के तट के पास एक जहाज पर हमला हुआ है. हालांकि, ट्रंप ने यह नहीं बताया कि हमला किस जहाज पर हुआ.
ईरान की चेतावनी- होर्मुज पर अमेरिका का साथ न दें
इधर, ईरान ने शुक्रवार (26 जून 2026) को फिर कहा कि होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही और सुरक्षा में उसकी अहम भूमिका है. ईरान की सरकारी मीडिया इरना के मुताबिक, ईरान ने खाड़ी देशों को अमेरिका का साथ देने के खिलाफ भी चेतावनी दी.
अमेरिका और खाड़ी के 6 देशों ने होर्मुज पर जारी किया था बयान
दरअसल, अमेरिका और खाड़ी के 6 देशों ने एक संयुक्त बयान जारी कर कहा था कि होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों से कोई टोल नहीं वसूला जाना चाहिए. किसी एक देश का इस समुद्री रास्ते पर अकेले अधिकार नहीं हो सकता. ईरान ने इसी बयान पर प्रतिक्रिया दी है.
ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि होर्मुज में सुरक्षित आवाजाही भी संभव है. जब तटीय देश होने के नाते ईरान की भूमिका को स्वीकार किया जाए. ईरान को नजरअंदाज करके कोई भी नई व्यवस्था या दूसरा समुद्री रास्ता सुरक्षित नहीं बनाया जा सकता.
होर्मुज क्यों है इतना अहम?
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक रास्ते में से एक है. ग्लोबल लेवल पर समुद्र के रास्ते भेजे जाने वाले कच्चे तेल का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा इसी रूट से गुजरता है. ऐसे में यहां किसी भी तरह का सैन्य तनाव या हमला ग्लोबल एनर्जी मार्केट और तेल की कीमतों को प्रभावित कर सकता है.
जहाजों की आवाजाही पर असर
रिपोर्टों के मुताबिक, हाल के दिनों में संयुक्त राष्ट्र और अमेरिका की मदद से होर्मुज में फंसे जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए एक ऑप्शनल रूट बनाया गया था, लेकिन ड्रोन हमले के बाद इस ऑपरेशन को अस्थायी रूप से रोक दिया गया है. रिपोर्ट में बताया गया कि करीब 115 जहाज सुरक्षित बाहर निकल चुके हैं, जबकि सैकड़ों जहाज अब भी इस क्षेत्र में फंसे हुए हैं. हमले के बाद कई जहाजों ने अपनी दिशा बदल दी और मरीन ट्रैफिक की रफ्तार भी धीमी पड़ गई.
क्या फिर बढ़ेगा तनाव?
अगर इस घटना के बाद अमेरिका और ईरान के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज होते हैं, तो हाल ही में बनी शांति प्रक्रिया को झटका लग सकता है. इससे न सिर्फ मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ेगा, बल्कि ग्लोबल तेल की सप्लाई और इंटरनेशनल शिपिंग पर भी असर पड़ सकता है.
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