वाशिंगटन: उत्तर कोरिया के शासक किम जोंग उन से मुलाकात और ऐतिहासिक साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस के ठीक दस दिन बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उत्तर कोरिया पर प्रतिबंध एक साल के लिए बढ़ा दिया. ट्रंप ने किम जोंग-उन के शासन पर प्रतिबंध बढ़ाने के लिए प्योंगयांग के परमाणु हथियारों से ‘‘असामान्य एवं असाधारण खतरे’’ का हवाला दिया.

वहीं इससे ठीक उलट शिखर वार्ता से लौटने बाद ट्रंप ने वार्ता सफल रहने का दावा करते हुए ट्वीट किया था, ‘‘उत्तर कोरिया से परमाणु संबंधी अब कोई खतरा नहीं है. आज रात आराम से सोएं.’’

राष्ट्रपति का शुक्रवार को कांग्रेस को भेजा संदेश उनकी बात से विपरीत है. इस संदेश में उन्होंने यह स्पष्ट किया है कि क्यों प्रशासन उत्तर कोरिया पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लागू रखेगा. यह प्रतिबंध सबसे पहले पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने लगाए थे. उसने कहा, ‘‘कोरियाई प्रायद्वीप में हथियारों का प्रसार – प्रयोग, विस्फोटक सामग्री के मौजूद होने तथा उसके खतरे और उत्तर कोरियाई सरकार की नीति के कारण राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति पर अब भी असामान्य एवं असाधारण खतरा बना हुआ है.’’ शुक्रवार को जारी बयान में उन्होंने कहा, ‘‘ मैं उत्तर कोरिया के संबंध में एक वर्ष तक प्रतिबंध जारी रख रहा हूं.’’

70 साल से दुश्मन रहे अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच 12 जून को पहली बार सिंगापुर में बातचीत हुई थी. 71 साल के ट्रम्प ने 34 साल के किम को परमाणु हथियार पूरी तरह खत्म करने पर राजी कर लिया था. ट्रम्प ने बदले में सुरक्षा की गारंटी दी थी. उत्तर कोरिया की बड़ी मांग मानते हुए ट्रम्प ने दक्षिण कोरिया के साथ संयुक्त युद्ध अभ्यास खत्म कर दिया था. ट्रम्प और किम 90 मिनट साथ रहे थे. 38 मिनट तक दोनों के बीच अकेले मुलाकात हुई थी. इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति ड्वाइट आइजनहॉवर (1953) से लेकर बराक ओबामा (2016) तक 11 अमेरिकी राष्ट्रपतियों ने उत्तर कोरिया का मसला सुलझाने की कोशिश की थी, लेकिन ट्रम्प जैसी कामयाबी किसी को नहीं मिली थी.