नई दिल्ली: विदेश मंत्री (External Affairs Minister) एस जयशंकर (S Jaishankar) ने कल गुरुवार को दुशांबे में शंघाई सहयोग संगठन (Shanghai Cooperation Organization) के सम्मेलन से इतर अपने चीनी समकक्ष (Chinese counterpart ) वांग यी (Wang Yi) से बैठक की और उन्‍होंने कहा कि पूर्वी लद्दाख में सैनिकों की वापसी की प्रक्रिया में प्रगति शांति बहाली के लिए आवश्यक है और यह संपूर्ण (द्विपक्षीय) संबंध के विकास
का आधार भी है. ताजाक‍िस्‍तान में चल रहे  शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के सम्मेलन में भारत और चीन के व‍िदेश मंत्री शम‍िल होने के लि‍ए पहुंचे हैं.Also Read - Attacks on Hindu Temples in Bangladesh: इस्कॉन ने PM मोदी से की अपील, कहा- हिंंसा रुकवाने बांग्लादेश में भेजें प्रतिनिधिमंडल

विदेश मंत्री एस जयशंकर और वांग यी ने दुशांबे में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के सम्मेलन से इतर बैठक की और वैश्विक घटनाक्रम पर विचारों का आपस में विचारों का आदान प्रदान किया. समझा जाता है कि इस भेंटवार्ता में अफगानिस्तान के घटनाक्रम का विषय भी उठा. Also Read - भारत UNHRC में तीन साल के लिए बहुमत के साथ फिर से निर्वाचित, 183 वोट मिले

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जयशंकर ने ट्वीट किया, ”चीन के विदेश मंत्री वांग यी से दुशांबे में एससीओ की बैठक से इतर मुलाकात हुई. अपने सीमावर्ती क्षेत्रों से सैनिकों की वापसी पर चर्चा की और यह रेखांकित किया कि शांति बहाली के लिए यह बेहद जरूरी है और यह द्विपक्षीय संबंधों में प्रगति का आधार है.”

बैठक के बाद जयशंकर ने कहा कि भारत सभ्यताओं के टकराव संबंधी किसी भी सिद्धांत पर नहीं चलता है. समझा जाता है कि अफ़गानिस्तान के घटनाक्रम पर भी बातचीत हुई. जयशंकर ने कहा, ”यह भी आवश्यक है कि भारत के साथ अपने संबंधों को चीन किसी तीसरे देश की निगाह से नहीं देखे. उन्होंने कहा, ”जहां तक एशियाई एकजुटता की बात है तो चीन और भारत को उदाहरण स्थापित करना होगा.”

बता दें कि पिछले साल पांच मई को पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन की सेनाओं के बीच गतिरोध के हालात बने थे और पैंगोंग झील क्षेत्र में हिंसक झड़प के दौरान दोनों पक्षों के सैनिक मारे गए थे। मौजूदा समय में वास्तविक नियंत्रण रेखा से लगे संवेदनशील सेक्टर में प्रत्येक तरफ 50,000 से 60,000 सैनिक तैनात हैं.