भूकंप से हिली भारत के मित्र देश की धरती, लोगों को आ गई 2011 में आई प्रलय की याद, कई सेकेंड तक महसूस हुए झटके

फुकुशिमा, मियागी और इवाते प्रांत में भूकंप के सबसे ज्यादा झटके महसूस हुए. भूकंप के झटके कई सेकेंड तक महसूस किए गए. लोग अपने घरों से बाहर निकल आए और अफरातफरी का माहौल बन गया.

Published date india.com Published: October 5, 2025 12:39 PM IST
(प्रतीकात्मक तस्वीर)
(प्रतीकात्मक तस्वीर)

Earthquake in Japan: शनिवार, 4 अक्टूबर की रात जापान में भूकंप के तगड़े झटके महसूस किए गए. रिक्टर पैमाने पर भूकंप की 6.0 मापी गई. राष्ट्रीय भूकंप केंद्र (एनसीएस) की ओर से साझा जानकारी के अनुसार शनिवार देर रात भूकंप का केंद्र जमीन के अंदर 50 किलोमीटर गहराई में था.

2011 में आई प्रलय का जिक्र क्यों?

फुकुशिमा, मियागी और इवाते प्रांत में भूकंप के सबसे ज्यादा झटके महसूस हुए. भूकंप के झटके कई सेकेंड तक महसूस किए गए. लोग अपने घरों से बाहर निकल आए और अफरातफरी का माहौल बन गया. कुछ देर के लिए लोगों को 2011 में आई प्रलय याद आ गई.

भूकंप का केंद्र समुद्र के भीतर था. इसकी गहराई केवल 50 किलोमीटर था. हालांकि मौसम विभाग ने भूकंप के बाद सुनामी की कोई चेतावनी जारी नहीं की लेकिन लोगों को 2011 की वो प्राकृतिक आपदा याद आ गई जब भूकंप के परिणामस्वरूप हजारों लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी. भूकंप में जानमाल की क्षति को लेकर ज्यादा जानकारी सामने नहीं आई है.

क्यों जापान में ज्यादा भूकंप आते हैं?

जापान पेसिफिक रिंग ऑफ फायर में स्थिति है जिसकी वजह से यहां पर टेक्टोनिक प्लेटों की गतिविधि होती रहती है. यही कारण है कि जापान से अक्सर भूकंप की खबरें सामने आती है. भूकंप के बाद यहां सुनामी का भी खतरा बना रहता है.

जापान में अब तक का सबसे विनाशकारी भूकंप 11 मार्च 2011 को आया था जिसने खूब तबाही मचाई थी. जापान के तोहोकू (पूर्वी जापान) में 9.0-9.1 तीव्रता वाले भूकंप के आधे घंटे बाद समुद्र में 40 मीटर से भी ज्यादा ऊंची सुनामी उठी. इसकी वजह से जापान को बड़ी तबाही का सामना करना पड़ा था. इस प्राकृतिक आपदा में 18 हजार से ज्यादा लोग मारे गए और लापता हो गए. साथ ही बुनियादी ढ़ांचों का काफी नुकसान हुआ था.

2011 में आए इस भूकंप का असर जापान के फुकुशिमा परमाणु संयंत्रों पर भी देखने को मिला था. भूकंप की वजह से फुकुशिमा पावर प्लांट में रिसाव होने लगा. यह घटना जापान के इतिहास की सबसे विनाशकारी प्राकृतिक आपदाओं में से एक मानी जाती है.

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(इनपुट- एजेंसी)

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