लंदन: ब्रिटेन की सरकार ने यूरोपीय संघ (ईयू) के देशों से बाहर से लंबे समय के लिए आने वाले आगंतुकों और छात्रों पर एक तथाकथित ‘स्वास्थ्य अधिभार’ दोगुना करने का फैसला किया है. इस कदम से भारत भी प्रभावित होगा.दरअसल, अप्रैल 2015 में पेश किए गए अधिभार को 200 पाउंड से बढ़ा कर प्रति वर्ष 400 पाउंड कर दिया गया है. वहीं, छात्रों के लिए रियायती दर 150 पाउंड से बढ़ा कर 300 पाउंड कर दिया गया है. Also Read - IPL 2020: बेन स्टोक्स ने किया इशारा; जल्द हो सकते हैं यूएई के लिए रवाना

ब्रिटेन में कामकाज, अध्ययन या परिवार के सदस्यों के साथ छह महीने या अधिक समय तक ठहरने वाले ईयू से बाहर के सभी आगंतुकों द्वारा यह अधिभार चुकाया जाता है. Also Read - ENG vs AUS, 2nd ODI, Dream11 Team Hints: दूसरे वनडे मैच में ये होंगे 11 अहम खिलाड़ी

ब्रिटेन के स्वास्थ्य एवं सामाजिक देखभाल विभाग की योजना इस वृद्धि को इस साल के आखिर से प्रभावी बनाने की है ताकि सरकार से वित्त प्राप्त राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा (एनएचएस) के लिए अतिरिक्त कोष जुटाया जा सके, जो कोष की कमी का सामना कर रहा है. Also Read - ENG vs AUS, 2nd ODI live streaming: कब और कहां देख सकते हैं इंग्लैंड-ऑस्ट्रेलिया दूसरा वनडे

ब्रिटेन की आव्रजन मामलों की मंत्री केरोलीन नोक्स ने कहा कि अधिभार स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच की पेशकश करता है जो कई अन्य देशों की तुलना में कहीं अधिक व्यापक और कम लागत वाली है. इससे प्राप्त होने वाली आय सीधे एनएचएस सेवाओं में जाएगी. प्राक्लन विभागों के मुताबिक एनएचएस अधिभार अदा करने वाले लोगों के इलाज पर प्रतिवर्ष औसतन 470 पाउंड खर्च करता है.