वॉशिंगटन: संघीय जांच ब्यूरो (FBI) ने 11 सितंबर 2001 में आतंकवादी हमलों के लिए विमान अपहरण करने वाले सऊदी अरब के दो लोगों को मिले साजोसामान संबंधी सहयोग से जुड़े 16 पृष्ठों का नया दस्तावेज जारी किया है.दस्तावेजों में बताया गया है कि अपहरणकर्ता अमेरिका में सऊदी अरब के अपने साथियों के साथ संपर्क में थे, लेकिन इसका कोई सबूत नहीं है कि इस साजिश में सऊदी अरब सरकार शामिल थी.Also Read - Submarine Deal Issue: उत्‍तर कोरिया ने अमेरिका को दी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी

राष्ट्रपति जो बाइडन के इन दस्तावेजों को सार्वजनिक करने के आदेश के बाद हमले की 20वीं बरसी पर शनिवार को ये दस्तावेज जारी किए गए, वर्षों तक इन्हें गोपनीय रखा गया. हाल के हफ्तों में पीड़ितों के परिवारों ने बाइडन पर दस्तावेज जारी करने का दबाव डाला है. वे लंबे समय से उन रिकॉर्ड्स को जारी करने की मांग कर रहे हैं जो न्यूयॉर्क में चल रहे उनके मुकदमे में मददगार साबित हो सकते हैं. उनका आरोप है कि सऊदी अरब के वरिष्ठ अधिकारियों की हमलों में मिलीभगत थी. Also Read - US: SpaceX का स्‍पेसक्राफ्ट फ्लोरिडा तट के अटलांटिक महासागर में उतरा, 3 दिन तक ऑर्बिट की सैर कर लौटे चार अंतरिक्ष पर्यटक

सऊदी अरब सरकार किसी भी संलिप्तता से इनकार करती रही है. वॉशिंगटन में सऊदी दूतावास ने बुधवार को कहा कि वह सभी दस्तावेज जारी करने का समर्थन करता है ताकि हमेशा के लिए उसकी सरकार के खिलाफ निराधार आरोप खत्म हो जाए. Also Read - फ्रांस ने अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया से अपने राजदूत वापस बुलाए, इस वजह से रिश्‍ते में आई बड़ी दरार

शनिवार को जारी दस्तावेज में 2015 में एक ऐसे व्यक्ति के साक्षात्कार की जानकारी दी गई है, जिसने अमेरिकी नागरिकता के लिए आवेदन दिया था और कई साल पहले सऊदी अरब के उन नागरिकों से बार-बार संपर्क किया था. जांचकर्ताओं का कहना है कि इन्हीं नागरिकों ने अपहरणकर्ताओं को अहम साजोसामान संबंधी सहयोग दिया था.

बता दें कि अमेरिका में 11 सितंबर 2001 को आतंवादियों ने विमानों का अपहरण कर लिया था और अमेरिकी धरती पर अब तक के सबसे भयावह आतंकवादी हमले को अंजाम दिया था, विमानों से हमला करके ट्विन टॉवर गिरा दिए थे. इन हमलों में करीब 3,000 लोग मारे गए थे. आतंकी हमलों में मारे गए 90 से अधिक देशों के 2,977 लोग शामिल थे.

अमेरिका में दर्दनाक हमले की 20वीं बरसी वैश्विक महामारी कोरोना वायरस और अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की वापसी की पृष्ठभूमि में मनाई गई. इसे विडंबना ही कहेंगे कि अफगानिस्तान पर फिर उन्हीं लोगों का कब्जा हो गया है, जिन्होंने 11 सितंबर 2001 में हुए हमले के साजिशकर्ताओं को पनाह दी थी.