नई दिल्ली: सोचिए अगर आपको एक हफ्ते में केवल चार ही दिन ऑफिस जाना हो और एक दिन में केवल 6 घंटे काम करना हो तो कैसा रहेगा! हालांकि ज्यादातर कंपनियां इस सिस्टम से सहमत नहीं होंगी क्योंकि उन्हें लगेगा कि इससे उनकी प्रोडक्टिविटी कम हो जाएगी? लेकिन फिनलैंड की नई 34 वर्षीय प्रधान मंत्री सना मारिन (Sanna Marin) इससे विपरीत सोचती हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने एक हफ्ते में चार दिन काम करने का प्रस्ताव पेश किया है. हालांकि उनके इस आइडिया के कई आलोचक भी हैं जिनका मानना है कि वे ऐसा नहीं कर सकते हैं.

ऐसे में सवाल उठता है कि क्या फिनलैंडी की युवा पीएम सना का ये आइडिया कारगर है? लगता तो ऐसा ही है.

रिपोर्ट्स के मुताबिक काम करने के दिनों में कमी करने से प्रोडक्टिविटी में वृद्धि होती है. जब, अगस्त में, माइक्रोसॉफ्ट जापान ने सप्ताह में चार दिन काम करने को टेस्ट किया, तो पाया कि उसकी प्रोडक्टिविटी वर्क में लगभग 40% की वृद्धि हुई. वहीं मेलबोर्न के एक संगठन ने एक दिन में छह घंटे काम के दौरान पाया कि उसके ज्यादा एंप्लाई ने बेकार की गतिविधियाँ जैसे कि बेकार के ईमेल भेजना, लंबी बैठकों में बैठना और साइबरोबाफिंग (इंटरनेट पर उलझे रहना) आदि चीजों को खत्म कर दिया. बता दें कि ब्रिटिश बिजनेस सफलतापूर्वक फॉर डे वीक में बदल गए हैं, उनमें एलेक्ट्रा लाइटिंग, थिंक प्रोडक्टिव और पोर्टकुलिस लेगल्स शामिल हैं.

फिनलैंड की पीएम ने सोमवार को कैबिनेट की पहली बैठक में लचीले कामकाज का प्रस्ताव पेश करते हुए कहा- ‘देश में अब रोज 8 घंटे और हफ्ते में 5 दिन काम करने की जरूरत नहीं होगी. इससे बचने वाले समय को लोग परिवार और प्रियजनों के बीच बिताएं. इससे परिवार तो मजबूत होगा ही, देश की उत्पादन क्षमता भी बढ़ेगी.’

मारिन ने पड़ोसी देश स्वीडन का हवाला देते हुए कहा कि वहां 2015 में हफ्ते में 6 घंटे रोज काम करने के फैसले से क्रांतिकारी बदलाव आया है. वहां न सिर्फ उत्पादकता बढ़ी, बल्कि अमीरी और खुशहाली के पैमाने में भी उसने दो पायदान छलांग लगाई. फिनलैंड के लोगों ने इस प्रस्ताव का स्वागत किया है.