कुतुब मीनार से चार गुना ऊंची लपटें! कहां फूटा एक हजार फीट का लावे का फव्वारा?

Written By: Vineet Sharan Updated by: Vineet Sharan
Updated Date:April 29, 2026 3:43 PM IST

Kilauea Volcano: तेज दबाव वाली ज्वालामुखी गैसें तरल चट्टान को वेंट्स के जरिए ऊपर की ओर धकेलती हैं, जिससे आग के ये शानदार ऊर्ध्वाधर फव्वारे बनते हैं.

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Kilauea Volcano: अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ द इंटीरियर की ओर से एक मनमोहक 28-सेकंड का वीडियो शेयर किया गया है. इसमें आग की एक मीनार जैसी चीज हवा में काफी ऊंचाई तक नजर आ रही है. नारंगी रंग का यह नजारा सोशल मीडिया पर यूजर्स को बेहद पसंद आ रहा है.

रिपोर्ट के मुताबिक, ये वीडियो हवाई में स्थित किलाउआ ज्वालामुखी का है. इसमें आसमान में सैकड़ों फीट ऊपर पिघली हुई चट्टानें फेंकते हुए दिखाया गया है.

किलाउआ ज्वालामुखी पर क्या हो रहा है?

इस वीडियो में हलेमाउमाउ क्रेटर पर चल रहे विस्फोट चक्र का 23वां एपिसोड दिखाया गया है. एपिसोड 23 किलाउआ शिखर पर एक रिकॉर्ड तोड़ने वाली विस्फोट की घटना थी, जहां हलेमाउमाउ क्रेटर के अंदर लावा के विशाल फव्वारे 1,150 फीट की ऊंचाई तक पहुंचे.

कैसे बनते हैं लावा के फव्वारे

लावा के फव्वारे जो गैस की ओर से ऊपर धकेली गई पिघली हुई चट्टान की धाराएं होती हैं. यह ज्वालामुखी के मुंह से निकलती हैं और काफी ऊपर तक जाती हैं. इस ज्वालामुखी लावा धारा 1,150 फीट की ऊंचाई तक पहुंची है, जो एफिल टावर से भी ऊंचा है. भारत की राजधानी दिल्ली में स्थित कुतुब मीनार से चार गुना तक ऊंची है.

ये फव्वारे ज्वालामुखी गैसों मुख्य रूप से जलवाष्प और कार्बन डाइऑक्साइड के कारण बनते हैं, जो सतह पर पहुंचते ही तेजी से फैलती हैं. यह दबाव तरल लावा को वेंट्स (धरती की पपड़ी में मौजूद छेद) से बाहर धकेलता है, जिससे आग की एक ऊर्ध्वाधर बौछार पैदा होती है.

क्या है टेफ्रा

हवा में उड़ते हुए चमकते हुए टुकड़ों को टेफ्रा कहा जाता है. यह विस्फोट के दौरान वातावरण में फेंके गए किसी भी चट्टान के टुकड़ों के लिए इस्तेमाल होने वाला एक आम शब्द है.

इनमें से कुछ बारीक, कांच जैसी लड़ियां होती हैं. इन्हें 'पेले के बाल' (Pele’s hair) कहा जाता है. इनका नाम हवाई की अग्नि देवी के नाम पर रखा गया है. अन्य बड़े टुकड़े होते हैं जिन्हें 'ज्वालामुखी बम' कहा जाता है. जब ये नीचे गिरते हैं, तो अक्सर ये अभी भी तरल अवस्था में होते हैं, जिससे जमीन पर छींटों जैसी बनावट बन जाती है.

भले ही यह देखने में बहुत हिंसक लगे, लेकिन यह विस्फोट ज़्यादातर गहरे क्रेटर (गड्ढे) के अंदर ही सीमित रहता है. पिछले 16 महीनों में 45 बार जोरदार हलचल होने के बाद, 23 अप्रैल से हालात शांत हो गए हैं.

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