कोलंबो: श्रीलंका में नाटकीय राजनीतिक घटनाक्रम के बीच पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे शुक्रवार को नए प्रधानमंत्री बन गए. राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना ने मौजूदा प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे को बर्खास्त कर दिया. पूर्व राष्ट्रपति राजपक्षे के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण के दृश्य मीडिया को जारी किए गए और टीवी चैनलों पर दिखाए गए. 72 वर्षीय राजपक्षे ने शपथ लेने के बाद सिरिसेना के साथ अपनी एक तस्वीर साझा की. 2015 में विक्रमसिंघे के समर्थन से सिरिसेना राष्ट्रपति बने थे.

इससे पहले करीब एक दशक तक राजपक्षे की सरकार थी. उनकी सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रहे सिरिसेना ने उनसे अलग होकर राष्ट्रपति चुनाव लड़ा था. राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि राजपक्षे को प्रधानमंत्री बनाने के सिरिसेना के कदम से संवैधानिक संकट पैदा हो सकता है क्योंकि संविधान में 19वां संशोधन बहुमत के बिना विक्रमसिंघे को प्रधानमंत्री पद से हटाने की अनुमति नहीं देगा. राजपक्षे और सिरिसेना की कुल 95 सीटें हैं और सामान्य बहुमत से पीछे हैं. विक्रमसिंघे की यूएनपी के पास अपनी खुद की 106 सीटें हैं और बहुमत से केवल सात कम हैं.

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वहीं श्रीलंका में राष्ट्रपति द्वारा प्रधानमंत्री को हटाए जाने के बाद पैदा हुए राजनीतिक संकट के बीच शुक्रवार को अमेरिका ने वहां की राजनीतिक पार्टियों से संविधान का पालन करने और हिंसा नहीं करने की अपील की. श्रीलंका में सामने आए इस संकट पर अपनी पहली प्रतिक्रिया देते हुए अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने कहा कि वह द्वीप देश में हो रही गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं.

विदेश मंत्रालय ने एक ट्वीट में कहा, हम सभी पक्षों से श्रीलंका के संविधान के अनुरूप काम करने, हिंसा से दूर रहने और उचित प्रक्रिया का पालन करने की अपील करते हैं. विदेश मंत्रालय के दक्षिण एवं मध्य एशिया ब्यूरो ने कहा, “हम श्रीलंकाई सरकार से उम्मीद करते हैं कि वह मानवाधिकारों, सुधारों, जवाबदेही, न्याय और सामंजस्य के प्रति जिनेवा प्रतिबद्धताओं को बरकरार रखेगी.

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राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना की पार्टी ने उनके और विक्रमसिंघे के बीच तनाव बढ़ने के बीच शुक्रवार को सत्तारूढ़ गठबंधन से समर्थन वापस ले लिया. श्रीलंका फ्रीडम पार्टी (एसएलएफपी) और यूनाइटेड नेशनल पार्टी (यूएनपी) की गठबंधन सरकार उस समय संकट में आ गई थी जब पूर्व राष्ट्रपति राजपक्षे की नई पार्टी ने फरवरी में स्थानीय चुनावों में जबरदस्त जीत हासिल की थी जिसे सत्तारूढ़ गठबंधन के लिए जनमत संग्रह माना गया.

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पिछले सप्ताह खबर आई थी कि सिरिसेना ने अपने वरिष्ठ गठबंधन साझेदार यूएनपी पर उनकी और रक्षा मंत्रालय के पूर्व शीर्ष अधिकारी गोताभया राजपक्षे की हत्या की कथित साजिश को गंभीरता से नहीं लेने का आरोप लगाया. गोताभया राजपक्षे पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे के भाई हैं.