
Shivendra Rai
उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के रहने वाले शिवेन्द्र राय को हिंदी डिजिटल पत्रकारिता में 5 साल का अनुभव है. वाराणसी के महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से इतिहास में एमए ... और पढ़ें
S Jaishankar on Iran war: संसद में बजट सत्र के दूसरे चरण की शुरुआत आज हंगामे के साथ हुई. राज्यसभा में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच छिड़े युद्ध और इसके प्रभावों को लेकर जवाब दिए. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि पश्चिम एशिया में तनाव कम करने के लिए बातचीत और डिप्लोमेसी को आगे बढ़ाया जाना चाहिए. विदेश मंत्री जब जवाब दे रहे थे तब विपक्षी सदस्यों ने नारेबाजी करते हुए सदन से वॉकआउट किया. लोकसभा में भी विपक्ष के सदस्यों ने हंगामा किया.
पश्चिम एशिया में पिछले 10 दिनों से जारी संघर्ष पर राज्यसभा में भारत का रुख बताते हुए विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी घटनाक्रम पर करीब से नजर रख रहे हैं. उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने 20 फरवरी को एक बयान जारी कर गहरी चिंता जताई थी और सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की थी. हमारा मानना है कि तनाव कम करने के लिए बातचीत और डिप्लोमेसी को आगे बढ़ाना चाहिए.
तेल और गैस की आपूर्ति को लेकर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा, “हमारी एनर्जी सिक्योरिटी पर इस संघर्ष के असर को देखते हुए सरकार यह पक्का करने के लिए प्रतिबद्ध है कि वह एनर्जी मार्केट की उपलब्धता, कीमत और जोखिम को ध्यान में रखे. हमारे लिए भारतीय ग्राहक का हित ही हमेशा सबसे ऊपर रहेगा.”
एस जयशंकर ने बताया कि प्रधानमंत्री लगातार हर डेवलपमेंट पर करीब से नजर रखे हुए हैं. संबंधित मंत्रालय जवाब देने के लिए कोऑर्डिनेट कर रहे हैं. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, 1 मार्च को प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में कैबिनेट कमिटी ऑफ़ सिक्योरिटी (CCS) की मीटिंग हुई थी. इसमें ईरान में एयरस्ट्राइक और उसके बाद कई खाड़ी देशों में हुए हमलों के बारे में जानकारी दी गई.
संघर्ष वाले देशों में फंसे नागरिकों को लेकर एस जयशंकर ने कहा कि कल तक हमारे लगभग 67,000 नागरिक लौटने के लिए इंटरनेशनल बॉर्डर पार कर चुके हैं. वेस्ट एशिया से हमारे लोगों को वापस लाने की पूरी कोशिश की जा रही है.
विदेश मंत्री ने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रही लड़ाई भारत के लिए “खास चिंता” का विषय है. एक करोड़ से ज्यादा भारतीय खाड़ी देशों में रहते हैं और काम करते हैं. ईरान में भी कुछ हजार भारतीय पढ़ाई या नौकरी के लिए हैं. यह इलाका हमारी ऊर्जा सुरक्षा के लिए जरूरी है. एस जयशंकर ने कहा कि सप्लाई चेन में रुकावट गंभीर मुद्दा है.
एस जयशंकर ने संसद में कहा कि संघर्ष लगातार बढ़ता जा रहा है इलाके में सुरक्षा की स्थिति काफी खराब हो गई है. यह संघर्ष दूसरे देशों में भी फैल गया है. उन्होंने कहा कि भारतीय दूतावास ने तेहरान में कई भारतीय छात्रों को बाहर की जगहों पर शिफ्ट करने में मदद की है. ईरान में व्यापार के लिए गए नागरिकों को आर्मेनिया पार करके भारत लौटने में मदद की गई है. विदेश मंत्री ने बताया कि तेहरान में हमारी एम्बेसी पूरी तरह चालू है और हाई अलर्ट पर है.
एस जयशंकर ने कहा कि ईरान के विदेश मंत्री ने ईरानी युद्धपोत लवन को कोच्चि पोर्ट पर डॉक करने की इजाजत देने के लिए भारत का शुक्रिया अदा किया है. विदेश मंत्री ने ये भी कहा कि इस समय लीडरशिप लेवल पर ईरान के साथ संपर्क करना बहुत मुश्किल है.
एस जयशंकर ने सदन को यह भी बताया कि लड़ाई की वजह से दो भारतीय नाविक (मर्चेंट शिपिंग) मारे गए हैं और एक अभी भी लापता है.
एस जयशंकर ने कहा कि भारत ने शुरू से ही इस मामले को लेकर चिंता व्यक्त की और सभी पक्षों से संयम बरतने, तनाव बढ़ाने से बचने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह किया.
एस जयशंकर ने कहा कि सरकार ने जनवरी से लगातार यात्रा परामर्श जारी किया है. भारतीय नागरिकों से गैर-जरूरी यात्रा टालने और पहले से वहां रहने वालों को भारतीय दूतावास के संपर्क में रहने और सुरक्षा सावधानियां अपनाने के लिए कहा गया है.
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