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बांग्लादेश छोड़ने के 2 साल बाद पहली बार छलका शेख हसीना का दर्द, कैमरा ऑफ कर बताया दिल का हाल

बांग्लादेश के अलग-अलग जगहों पर 5 अगस्त 2024 को हुए छात्र आंदोलन और हिंसा की घटनाएं हुई थीं. प्रदर्शनकारी तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना के सरकारी आवास तक पहुंच गए थे. इसके बाद वह इस्तीफा देकर सेना के विमान से भारत आ गई थीं.

Written by: Anjali Karmakar
Updated: August 5, 2026, 7:47 PM IST

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना छात्र आंदोलन के बाद से भारत में राजनीतिक शरणार्थी के तौर पर रह रही हैं. गुरुवार (5 अगस्त 2026) को बांग्लादेश छोड़ने के 2 साल हो चुके हैं. इस मौके पर शेख हसीना ने पहली बार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बांग्लादेश को संबोधित किया. इस दौरान हसीना का चेहरा नहीं दिखा. उन्होंने कैमरा ऑफ रखा था. सिर्फ उनकी आवाज सुनाई दे रही थी. शेख हसीना ने बांग्लादेश को बड़ा राजनीतिक मैसेज दिया है. वहीं, देश छोड़ने का दर्द भी शेयर किया है और मुश्किल दौर में साथ देने के लिए भारत का शुक्रिया भी अदा किया है.

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आइए जानते हैं शेख हसीना ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में क्या-क्या कहा:-

  • शेख हसीना ने कहा, “मुझे पता है कि वे मुझे जेल में डाल सकते हैं या मार भी सकते हैं, फिर भी मैं बांग्लादेश वापस जाउंगी. लोगों का समर्थन मेरे लिए बहुत जरूरी है. मौत की सजा, झूठे मुकदमे और दिखावटी सुनवाई मुझे डरा नहीं सकती। मेरे खिलाफ चल रही कानूनी कार्रवाई गैरकानूनी, असंवैधानिक और राजनीतिक मकसद से प्रेरित है.”
  • शेख हसीना ने कहा, “मैंने अपनी इच्छा से बांग्लादेश नहीं छोड़ा था. प्रदर्शनकारियों के प्रधानमंत्री आवास की ओर बढ़ने पर मेरे पास वहां से निकलने के लिए सिर्फ 30 से 40 मिनट का समय था.”
  • उन्होंने कहा, “मुझे यह भी नहीं पता था कि मैं देश छोड़कर जा रही हूं.” हसीना ने दावा किया कि वह अपने पैतृक गांव तुंगीपाड़ा जाने की तैयारी कर रही थीं, लेकिन हालात ऐसे बने कि उन्हें देश छोड़ना पड़ा.

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  • शेख हसीना ने कहा, “मैंने पिछले 2 सालों से बांग्लादेश को तकलीफ में देखा है. घरों और काम की जगहों पर डर फैल गया है. यह वह बांग्लादेश नहीं है, जिसे मैंने बनाया था और यह वह बांग्लादेश भी नहीं है, जिसके लिए 1971 में लाखों लोगों ने अपनी जान की कुर्बानी दी थी.”
  • शेख हसीना ने दावा किया कि जुलाई 2024 के आंदोलन के दौरान 450 से ज्यादा पुलिस थानों में आग लगा दी गई. सरकारी इमारतों पर हमले हुए, कई पुलिसकर्मी मारे गए और कुछ को जिंदा जला दिया गया.
  • हसीना ने सवाल उठाया, “क्या ऐसे हालात में कानून-व्यवस्था बनाए रखना सुरक्षा बलों की जिम्मेदारी नहीं थी?” उन्होंने कहा कि पुलिस ने अपनी जिम्मेदारी निभाने की कोशिश की, लेकिन बाद में उसी कार्रवाई को उनके खिलाफ इस्तेमाल किया गया.
  • हसीना ने भारत को मित्र देश बताते हुए कहा कि वह हमेशा बांग्लादेश का अच्छा दोस्त रहा है. जब भी बांग्लादेश किसी मुश्किल हालात में होता है, भारत हमेशा उसके साथ खड़ा रहता है- चाहे वह 1971 हो, 1975 हो या आज का समय.
  • हसीना ने कहा,”सरकारों के बीच के संबंध अलग हो सकते हैं, लेकिन भारत हमेशा से एक अच्छा दोस्त रहा है और मुझे पता है कि वह आगे भी ऐसा ही रहेगा.” उन्होंने यह भी कहा कि भारत भले ही मित्र देश है, लेकिन उन्हें अपने लोगों के पास जाना है.

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