खुद के परमाणु हथियारों पर नहीं है पाकिस्तान का कंट्रोल! CIA के पूर्व अधिकारी ने खोले चौंकाने वाले राज, परवेज मुशर्रफ ने...

पूर्व CIA अधिकारी जॉन किरियाकू के अनुसार, अमेरिका के डॉलरों के लालच में पाकिस्तान के पूर्व सैन्य तानाशाह परवेज़ मुशर्रफ ने परमाणु हथियारों का कंट्रोल अमेरिका को सौंप दिया था.

Published date india.com Published: October 25, 2025 10:31 AM IST
खुद के परमाणु हथियारों पर नहीं है पाकिस्तान का कंट्रोल! CIA के पूर्व अधिकारी ने खोले चौंकाने वाले राज, परवेज मुशर्रफ ने...

Pakistan’s nuclear weapons: परमाणु हथियारों की धमकी देना पाकिस्तान की सबसे फेवरेट बुरी आदत है. लेकिन पाकिस्तानी परमाणु हथियारों के बारे में अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA के पूर्व अधिकारी ने ऐसा चौंकाने वाला खुलासा किया है जिसे जानकर आप दंग रह जाएंगे. सीआईए के पूर्व अधिकारी जॉन किरियाकू ने न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में बताया कि पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने अपने देश के परमाणु हथियार अमेरिका को सौंप दिए थे.

पूर्व CIA अधिकारी जॉन किरियाकू के अनुसार, अमेरिका के डॉलरों के लालच में पाकिस्तान के पूर्व सैन्य तानाशाह परवेज़ मुशर्रफ ने परमाणु हथियारों का कंट्रोल अमेरिका को सौंप दिया था. पाकिस्तानी न्यूक्लियर वेपंस पर अमेरिकी कंट्रोल लंबे समय तक रहा.

जॉन किरियाकू ने बातचीत में पाकिस्तान के वो काले सच बयां किए जो दुनिया नहीं जानती. उन्होंने बताया कि अमेरिका ने मुशर्रफ को खरीद लिया था और पाकिस्तान में अमेरिकी एजेंसियां अपनी मर्जी के मुताबिक खुलकर काम करती थीं.

मुशर्रफ के दोहरे खेल का खुलासा

जॉन किरियाकू ने कहा कि मुशर्रफ एक तरफ आतंक से लड़ने के नाम पर अमेरिका से लाखों डॉलर लिया करते थे तो दूसरी तरफ आतंकियों को भारत के खिलाफ इस्तेमाल करते थे. पूर्व CIA अधिकारी ने ये भी कहा कि मुशर्रफ की आतंक के खिलाफ लड़ाई एक दिखावा थी और उन्हें पाकिस्तानी सेना को अल-कायदा की परवाह नहीं थी. पर्दे के पीछे आतंकियों के साथ मिलकर मुशर्रफ भारत के खिलाफ काम कर रहे थे.

जॉन किरियाकू ने ये भी बताया कि परमाणु तकनीक बेचने के आरोपी पाकिस्तानी परमाणु वैज्ञानिक अब्दुल कादिर खान को सऊदी अरब ने बचाया था. इस दौरान सऊदी अरब भी परमाणु तकनीक पर काम कर रही था और अब्दुल कादिर खान की मदद ले रहा था. जॉन किरियाकू ने अमेरिका की भी पोल खोली और बताया कि खुद को लोकतंत्र और मानवाधिकारों का रक्षक दिखाना सिर्फ छलावा है. अमेरिका वही करता है जिसमें उसका फायदा हो.

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