India-United Arab Emirates Reltion: भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संयुक्त अरब अमीरात के आधिकारिक दौरे पर अबू धाबी पहुंचे हैं. इस दौरे का मकसद दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करना है. पिछले एक साल की घटनाओं पर नजर डालें तो पता चलता है कि भारत और यूएई के संबंध पहले से ज्यादा घनिष्ठ हुए हैं. जबकि, इसके रिश्ते पाकिस्तान और सऊदी अरब के साथ खराब हुए हैं. आखिर इसके पीछे क्या कारण है, जानते हैं विस्तार से.
संयुक्त अरब अमीरात कुछ साल पहले तक पाकिस्तान को भरोसे लायक देश मानता था. यूएई हर मुश्किल में पाकिस्तान का साथ देता था. इसने न जाने कितनी बार कर्ज देकर पाकिस्तान को आर्थिक संकट से निकाला. लेकिन, पाकिस्तान ने ये भरोसा अब खो दिया है. जब सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के बीच रिश्ते तल्ख हुए तो पाकिस्तान पूरी तरह से सऊदी के पाले में खड़ा दिखा. रही सही कसर पाकिस्तान और सऊदी के डिफेंस पैक्ट ने पूरी कर दी.
हाल के महीनों में अमीराती अधिकारियों ने लगभग 15,000 पाकिस्तानी नागरिकों को देश से निकाला है. एतिहाद एयरवेज ने भी कई पाकिस्तानी कर्मचारियों को बर्खास्त किया है और देश छोड़ने का आदेश दिया. इतना ही नहीं संयुक्त अरब अमीरात ने पाकिस्तान से 35 लाख अमेरिकी डॉलर का कर्ज चुकाने को भी कहा. ये सभी घटनाक्रम मिलकर संबंधों में गंभीर गिरावट का संकेत देते हैं.
अमेरिका स्थित थिंक टैंक, मिडिल ईस्ट फोरम के अनुसार, यूएई से संबंधों में किसी भी प्रकार की दीर्घकालिक गिरावट पाकिस्तान की आर्थिक कमजोरियों को बढ़ाएगी. इस रिपोर्ट में विस्तार से बताया गया है कि यह साझेदारी सितंबर 2025 में पाकिस्तान द्वारा सऊदी अरब के साथ एक पारस्परिक रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद टूटनी शुरू हुई. इस समझौते के अनुसार, एक पर हमला दोनों पर हमला माना जाएगा. पाकिस्तान के इस कदम से अबू धाबी नाराज हो गया.
हालिया अमेरिका-ईरान संघर्ष के दौरान पाकिस्तान ईरान के ज्यादा करीब नजर आया. इस दौरान ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात पर भी कई हमले किए लेकिन पाकिस्तान यूएई के साथ खड़ा नहीं हुआ. अब अमीरातियों का मानना है कि पाकिस्तान ने ईरान के प्रति सहानुभूति दिखाई. पाकिस्तान को वर्षों से आर्थिक सहायता दे रहे यूएई को उम्मीद थी कि यह उसके पक्ष में खड़ा रहेगा.
यूएई (UAE) तेल उत्पादन करने वाले देशों के समूह OPEC से भी बाहर हो गया है. इस समूह में सऊदी अरब का दबदबा है और यह सभी देशों के तेल उत्पादन की मात्रा को कंट्रोल करता है. इससे UAE नाखुश था. इसके अलावा यमन में दोनों देश एक-दूसरे के खिलाफ खड़े हैं. यमन में सऊदी अरब जहां सरकार का समर्थन करता है, वहीं यूएई दक्षिणी अलगाववादियों (STC) का समर्थन करता है. इस मामले को लेकर दोनों देश के बीच तनाव हाल में काफी बढ़ गया है.
(IANS इनपुट के साथ)
ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें फेसबुक पर लाइक करें या ट्विटर पर फॉलो करें. India.Com पर विस्तार से पढ़ें World Hindi की और अन्य ताजा-तरीन खबरें
By clicking “Accept All Cookies”, you agree to the storing of cookies on your device to enhance site navigation, analyze site usage, and assist in our marketing efforts Cookies Policy.