ब्रिटेन की एक अदालत ने सोमवार को भगोड़े कारोबारी विजय माल्या (Vijay Mallya) को दिवालिया घोषित किए जाने का आदेश जारी किया. इससे भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की अगुवाई में भारतीय बैंकों के समूह के लिये बंद पड़ी एयरलाइन किंगफिशर के ऊपर बकाये कर्ज की वसूली को लेकर वैश्विक स्तर पर उनकी सम्पत्तियों की जब्ती की कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है. लंदन हाई कोर्ट के उच्चतम न्यायालय प्रभाग के मुख्य ऋण शोधन और दिवाला तथा कंपनी मामलों के न्यायालय (आईसीसी) के न्यायाधीश माइकल ब्रिग्स ने ऑनलाइन सुनवाई के दौरान अपने फैसले में कहा, ‘… मैं माल्या को दिवालिया घोषित करता हूं.’Also Read - World News: दक्षिण अफ्रीका की शीर्ष अदालत ने पूर्व राष्ट्रपति Jacob Zuma की जेल की सजा बरकरार रखी

विधि कंपनी टीएलटी एलएलपी और अधिवक्ता मार्सिया शेकरडेमियन ने भारतीय बैंकों का प्रतिनिधित्व किया और दिवालियापन के आदेश को लेकर अपने तर्क रखे. कारोबारी 65 साल के माल्या ब्रिटेन में फिलहाल जमानत पर हैं. ऐसा समझा जाता है कि प्रत्यर्पण प्रक्रिया से जुड़े एक अलग मामले में देश में शरण देने के मुद्दे पर गोपनीय कानूनी कार्रवाई का समाधान होने तक वह जमानत पर रह सकते हैं. Also Read - कोविड टीके की दोनों खुराक लेने वाले भारत समेत 15 देशों के लोग लौट सकते हैं यूएई लेकिन यह है शर्त...

उनके वकील फिलिप मार्शल ने मामले में स्थगन के साथ-साथ आदेश को स्थगित करने का आग्रह किया. हालांकि, न्यायाधीश ने आग्रह ठुकरा दिया. उन्होंने कहा कि इस बात के ‘अपर्याप्त सबूत’ है कि याचिकाकर्ताओं को ऋण उचित समय के भीतर पूरी तरह से वापस कर दिया जाएगा. उन्होंने दिवालियापन के आदेश के खिलाफ अपील करने की अनुमति मांगने वाला एक आवेदन भी रखा, जिसे न्यायाधीश ब्रिग्स ने अस्वीकार कर दिया. Also Read - Nationwide Lockdown News: कोरोना के तेजी से बढ़ते मामलों के बाद यहां 6 सितंबर तक बढ़ाया गया लॉकडाउन

कर्ज वसूली से जुड़े मामले में तेरह बैंकों के समूह याचिकाकर्ता हैं. याचिकाकर्ता एक अरब ब्रिटिश पौंड के कर्ज के संदर्भ में दिवालिया आदेश के क्रियान्वयन को लेकर कानूनी कार्रवाई कर रहे हैं. माल्या के वकीलों की टीम ने तर्क दिया कि कर्ज विवादित बना हुआ है और भारत में चल रही कार्यवाही ब्रिटेन में दिवालियापन के आदेश को निषेध करता है.

(इनपुट: भाषा)