टोक्‍यो: जी-20 समिट के लिए जापान की यात्रा पर पहुंचे पीएम नरेंद्र मोदी ने कोबे शहर में भारतीय समुदाय के सदस्‍यों को गुरुवार को संबोधित करते हुए कहा कि न्‍यू इंडिया की आशाओं और आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए मिला ये आदेश पूरे विश्व के साथ हमारे संबंधों को भी नई ऊर्जा देगा. उन्‍होंने कहा कि सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास के जिस मंत्र पर हम चल रहे हैं, वो भारत पर दुनिया के विश्वास को भी मजबूत करेगा.

पीएम ने कहा कि जब दुनिया के साथ भारत के रिश्तों की बात आती है तो जापान का उसमें एक अहम स्थान है. ये रिश्ते आज के नहीं हैं, बल्कि सदियों के हैं. इनके मूल में आत्मीयता है, सद्भावना है, एक दूसरे की संस्कृति और सभ्यता के लिए सम्मान है. हमारी बोलचाल के भी कुछ सूत्र हैं जो हमें जोड़ते हैं. मोदी ने कहा कि जिसे भारत में ‘ध्यान’ कहा जाता है, उसे जापान में ‘झेन ‘ कहा जाता है. और जिसे भारत में ‘सेवा’ कहा जाता है, उसे जापान में भी ‘सेवा’ कहा जाता है.

मोदी ने कहा कि लगभग 2 दशक पहले, प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी और प्रधानमंत्री योशिरो मोरी जी ने मिलकर हमारे रिश्तों को ग्‍लोबल पार्टनरशिप को का रूप दिया था. उन्‍होंने कहा कि 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद, मुझे मेरे मित्र प्रधानमंत्री शिंज़ो आबे के साथ मिलकर इस दोस्ती को मजबूत करने का मौका मिला.

दिल्ली के अलावा अहमदाबाद और वाराणसी प्रधानमंत्री आबे को ले जाने का सौभाग्य मुझे मिला. प्रधानमंत्री आबे मेरे संसदीय क्षेत्र और दुनिया की सबसे पुरानी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक नगरी में से एक काशी में गंगा आरती में शामिल हुए. उनकी ये तस्वीरें भी हर भारतीय के मन में बस गई हैं.

पीएम ने कहा कि एक समय था जब हम कार बनाने में सहयोग कर रहे थे और आज हम बुलेट ट्रेन बनाने में सहयोग कर रहे हैं.आज भारत का ऐसा कोई भाग नहीं है जहां जापान के प्रोजेक्ट्स या इंवेस्टमेंट्स ने अपनी छाप न छोड़ी हो. इसी प्रकार भारत का टैलेंट और मैनपावर जापान को मजबूत करने में योगदान दे रहा है:

प्रधानमंत्री के रूप में यह मेरी जापान की चौथी यात्रा है. यात्राओं में जापान में भारत के प्रति एक आत्मीयता, एक अपनापन अनुभव किया. पीएम ने कहा कि अपनी सभ्यता और अपने मूल्यों पर गर्व करना, टैलेंट और टैक्‍नोलॉली को राष्ट्रनिर्माण का हिस्सा बनाना, ये मैंने जापान में प्रत्यक्ष अनुभव किया है.

पीएम मोदी ने कहा कि हमने साइक्‍लोन फानी को कम से कम नुकसान होने पर मैनेज किया और दुनिया तारीफ की कि सरकारी मशीनरी, मानव संसाधन और स्‍पेस टेक्‍नोलॉजी का प्रयोग अच्‍छे किया. हम चंद्रयान-2 भी कुछ महीनों में करेंगे और 2022 तक भारत की पहला मानव मिशन स्‍पेसफ्लाइट प्रोगाम गगनयान लॉन्‍च करने की योजना बना रहे हैं.