कुत्ता पालना है तो पहले दीजिए 2 घंटे का रिटेन टेस्ट और प्रैक्टिकल, 80% स्कोर जरूरी, इस देश ने बनाया रूल

Pet Law: इस देश में कुत्ता पालने के लिखित और प्रैक्टिकल परीक्षा देनी पड़ती है. जानें कैसे टेस्ट नए मालिक को कानून और सुरक्षा का पालन करना सिखाते हैं.

Published date india.com Published: December 2, 2025 10:25 PM IST
कुत्ता पालना है तो पहले दीजिए 2 घंटे का रिटेन टेस्ट और प्रैक्टिकल, 80% स्कोर जरूरी, इस देश ने बनाया रूल

जर्मनी में कुत्ता पालने के लिए मालिक को पहले यह साबित करना पड़ता है कि वे उनके व्यवहार, स्थानीय कानून और जिम्मेदार पालन-पोषण को समझता है या नहीं. इसके लिए कुछ जगहों पर रिटेन टेस्ट और प्रैक्टिकल देना अनिवार्य है. यह कदम सिर्फ नियम बनाने के लिए नहीं, बल्कि समुदाय की सुरक्षा, कुत्तों की भलाई और परिवारों को जिम्मेदारी समझाने के लिए उठाया गया है.

रिटेन टेस्ट में 80% स्कोर करना जरूरी

जर्मनी में कुत्ता पालने से पहले लिखित परीक्षा देना जरूरी होता है. यह टेस्ट कुत्तों की देखभाल, उनके प्रशिक्षण, स्वास्थ्य, आहार, सामाजिक व्यवहार, डर और आक्रामकता जैसे मुद्दों पर होती है. कई राज्यों में 80% सही उत्तर देने पर ही पास माना जाता है. परीक्षा के लिए ऑनलाइन या ऑफलाइन तैयारी की जा सकती है, और उम्मीदवार हैंडबुक, ऑनलाइन सवालों या प्रशिक्षण स्कूल की मदद से अभ्यास करते हैं.

प्रैक्टिकल भी तीन चरणों में होता

रिटेन टेस्ट पास करने के बाद मालिक को प्रैक्टिकल देना पड़ता है. इसमें कुत्ते के साथ उनके व्यवहार, आज्ञाकारिता, सामाजिक व्यवहार और नियंत्रण क्षमता का मूल्यांकन होता है. परीक्षण तीन चरणों में होता है – शांत वातावरण, हल्का व्यस्त क्षेत्र और अंत में शहर की व्यस्त सड़कें. इसका उद्देश्य है कि कुत्ता और मालिक दोनों सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षित और शांतिपूर्ण रहें. साथ ही पंजीकरण, टैक्स, माइक्रोचिप, लाइसेंस और बीमा जैसी कानूनी जिम्मेदारियां भी पूरी करनी होती हैं.

क्या है इस परीक्षा का मुख्य उद्देश्य

जर्मनी में कुत्ते पालना केवल व्यक्तिगत खुशी नहीं है, बल्कि यह समाज के प्रति जिम्मेदारी का प्रतीक भी है. मालिक को कुत्ते की देखभाल, प्रशिक्षण, सफाई और कानून का पालन करना होता है. इससे कुत्तों के लिए सुरक्षित माहौल बनता है और समुदाय में हिंसा या दुर्घटनाओं की संभावना कम होती है. इस प्रक्रिया से नए मालिक पूरी तरह तैयार होते हैं और कुत्तों के साथ सम्मानजनक और जिम्मेदार संबंध विकसित कर पाते हैं. जर्मनी का यह मॉडल दिखाता है कि जब हम किसी जीवित प्राणी की जिम्मेदारी लेते हैं, तो तैयारी और प्रतिबद्धता उसे सुरक्षित और खुशहाल बनाती है.

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