ब्रह्मांड का अनोखा शिकारी! आकाशगंगा से दूर भटकता मिला विशाल ब्लैक होल, तारे को निगलकर हुआ बेनकाब

Written By: Nandan Singh Updated by: Nandan Singh
Updated Date:August 8, 2026 9:32 AM IST

वैज्ञानिकों ने पहली बार आकाशगंगा के केंद्र से इतनी दूर एक निष्क्रिय सुपरमैसिव ब्लैक होल खोजा है. यह लंबे समय से छिपा था, मगर जैसे ही इसने एक गुजरते तारे को टुकड़ों में तोड़ा, अंतरिक्ष में निकली तेज चमक ने इसकी मौजूदगी का खुलासा कर दिया.

  • आकाश में छिपा था विशाल ब्लैक होल
  • 30 हजार प्रकाश वर्ष दूर भटकता मिला
  • तारे को निगलते ही खुला राज
  • वैज्ञानिकों की अनोखी खोज

अंतरिक्ष में एक ऐसा विशाल ब्लैक होल मिला है, जो अपनी आकाशगंगा के केंद्र से करीब 30 हजार प्रकाश वर्ष दूर भटक रहा था और लंबे समय से लगभग अदृश्य था. इसकी मौजूदगी का पता तब चला, जब इसने अपने बेहद करीब से गुजर रहे एक तारे को अपनी जबरदस्त गुरुत्वाकर्षण शक्ति से खींचकर टुकड़ों में तोड़ दिया. इस घटना से अचानक तेज रोशनी की चमक पैदा हुई, जिसने वैज्ञानिकों को इस छिपे हुए ब्लैक होल तक पहुंचने का रास्ता दिखाया. University of Maryland (UMD) के खगोलविदों के मुताबिक, यह पहली बार है जब किसी निष्क्रिय यानी डॉर्मेंट सुपरमैसिव ब्लैक होल को अपनी आकाशगंगा के केंद्र से इतनी दूर पाया गया है.

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यह ब्लैक होल करीब 9.3 किलोपार्सेक, यानी लगभग 30 हजार प्रकाश वर्ष की दूरी पर है, और इसका द्रव्यमान हमारी आकाशगंगा मिल्की वे के केंद्र में मौजूद सुपरमैसिव ब्लैक होल के बराबर बताया गया है. खास बात यह है कि इसके आसपास ऐसी कोई साफ दिखाई देने वाली बड़ी आकाशगंगा नहीं मिली, जैसी इतने बड़े ब्लैक होल के साथ आमतौर पर उम्मीद की जाती है. UMD के शोधकर्ताओं के अनुसार, इस खोज से यह धारणा बदल सकती है कि बड़े ब्लैक होल केवल आकाशगंगाओं के केंद्र में ही पाए जाते हैं.

तारे की आखिरी चमक

वैज्ञानिकों के लिए इस ब्लैक होल को ढूंढना आसान नहीं था, क्योंकि यह सामान्य समय में सक्रिय नहीं था. जब ब्लैक होल के आसपास पर्याप्त गैस या दूसरे पदार्थ नहीं होते, तो वह कोई खास रोशनी पैदा नहीं करता और दूरबीनों के लिए लगभग अदृश्य बना रहता है. इस मामले में वैज्ञानिकों को मदद मिली Zwicky Transient Facility (ZTF) से, जो कैलिफोर्निया के पालोमर ऑब्जर्वेटरी में लगे दो टेलीस्कोप की मदद से उत्तरी आकाश का सर्वे करता है और लगभग हर दो दिन में पूरे उत्तरी आकाश को स्कैन करता है. हर रात सैकड़ों हजारों खगोलीय घटनाएं दर्ज होती हैं, इसलिए हर घटना को इंसानों द्वारा जांचना संभव नहीं है.

इसी समस्या को हल करने के लिए UMD की टीम ने एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्रोग्राम तैयार किया, जो उस खास रोशनी के पैटर्न को पहचान सकता था जो तब पैदा होता है जब कोई ब्लैक होल किसी तारे को नष्ट करता है. इस घटना को टाइडल डिसरप्शन इवेंट कहा जाता है. टीम ने यह AI सिस्टम अगस्त 2025 में चलाना शुरू किया और सिर्फ तीन महीने बाद, नवंबर 2025 के आसपास, इसने उस घटना को पहचान लिया जिसके कारण भटकते हुए ब्लैक होल का पता चला. शोधकर्ताओं ने इसके बाद दूसरी दूरबीनों से भी जानकारी जुटाई ताकि इस असाधारण घटना की पुष्टि और बेहतर अध्ययन किया जा सके.

इंफोग्राफिक/notebooklm

बाहर कैसे पहुंचा ब्लैक होल

वैज्ञानिकों का मानना है कि इस ब्लैक होल की मौजूदा स्थिति किसी पुरानी आकाशगंगीय टक्कर या विलय से जुड़ी हो सकती है. पहली संभावना यह है कि कभी एक बड़ी आकाशगंगा ने एक छोटी आकाशगंगा को अपने अंदर मिला लिया हो. इस प्रक्रिया में बड़ी आकाशगंगा ने छोटी आकाशगंगा के ज्यादातर तारों को धीरे-धीरे खींचकर अलग कर दिया हो और आखिर में उसका घना केंद्रीय हिस्सा तथा ब्लैक होल पीछे रह गया हो. दूसरी संभावना इससे ज्यादा जटिल है. हो सकता है कि किसी आकाशगंगा के केंद्र में पहले से दो ब्लैक होल एक-दूसरे की परिक्रमा कर रहे हों. इसे बाइनरी ब्लैक होल कहा जाता है. बाद में किसी दूसरी आकाशगंगा के विलय के दौरान तीसरा ब्लैक होल वहां पहुंचा हो और तीनों के बीच हुई गुरुत्वाकर्षण की जटिल खींचतान ने छोटे ब्लैक होल को आकाशगंगा के केंद्र से बाहर धकेल दिया हो. अभी वैज्ञानिक यह तय नहीं कर पाए हैं कि इनमें से कौन-सी कहानी सही है. आगे इस तारे को निगलने की घटना का अध्ययन इससे जुड़े संकेत दे सकता है.

शोधकर्ताओं का कहना है कि यह खोज इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ज्यादातर ब्लैक होल, जिनमें मिल्की वे के केंद्र वाला ब्लैक होल भी शामिल है, निष्क्रिय अवस्था में रहते हैं. UMD टीम अब ऐसे और भटकते ब्लैक होल खोजने के लिए आकाश का अध्ययन कर रही है. शोधकर्ता रॉबर्ट स्टीन को उम्मीद है कि Vera C. Rubin Observatory जैसे नए उपकरण हर साल दर्जनों या संभवतः सैकड़ों ऐसे ब्लैक होल खोज सकते हैं. इस तरह की खोजों से वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद मिल सकती है कि आकाशगंगाएं कैसे बनती और विलय करती हैं तथा ब्रह्मांड में कितने विशाल ब्लैक होल अपने मूल स्थान से दूर घूम रहे हैं.

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