कम हो गया 'डॉलर का डंका'! टैरिफ नीति और भारत जैसे देशों से टकराकर ट्रंप ने बजा दी अमेरिका की बैंड

Gold replacing fiat currencies: आरबीआई भी सोने का भंडार बढ़ाने पर जो दे रहा है. वहीं यूएस ट्रेजरी बिल में पिछले एक साल में कमी आई है. डॉलर की धमक भी दुनिया भर में घटी है.

Published date india.com Updated: September 2, 2025 9:35 AM IST
कम हो गया 'डॉलर का डंका'! टैरिफ नीति और भारत जैसे देशों से टकराकर ट्रंप ने बजा दी अमेरिका की बैंड
(photo credit AI, for representation only)

Gold replacing fiat currencies: ऐसा लग रहा है कि दुनिया में यूएस ट्रेजरी बिल और डॉलर का रुतबा कम होता जा रहा है. आरबीआई भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी बढ़ा रहा है, जिससे अमेरिकी ट्रेजरी बिल की हिस्सेदारी कम हो रही है. अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ ट्रेजरी और आबीआई दोनों के हालिया आंकड़े इसकी गवाही दे रहे हैं. दुनिया के दूसरे देशों का भी कुछ ऐसा ही हाल है, जो डॉलर की जगह सोने को प्राथमिकता देते हुए विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ा रहे हैं.

और किन देशों में घटा यूएस ट्रेजरी बिल

चीन, ब्राजील, सऊदी अरब जैसे देशों ने जून 2024 की तुलना में जून 2025 में यूएस ट्रेजरी बिल में निवेश घटाया है.

भारत के भंडार में कितना बढ़ा सोना

जून 28 2024 को भारत के भंडार में 840.76 टन सोना था. जो जून 27 2025 को 879.98 मैट्रिक टन हो गया.

भारत और यूएस ट्रेजरी बिल

भारत के पास जून, 2024 में 242 अरब डॉलर के यूएस ट्रेजरी बिल थे, जो जून 2025 में घटकर 227 बिलियन डॉलर पहुंच गई है. हालांकि भारत के पास अब भी ब्राजील, सऊदी अरब, इजरायल और जर्मनी से ज्यादा यूएस ट्रेजरी बिल हैं.

डोनाल्ड ट्रंप की नीतियां जिम्मेदार

विशेषज्ञों के मुताबिक डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों के कारण अमेरिका अलग-थलग हो सकता है. 30 साल में पहली बार ग्लोबल इंटरनेशनल रिजर्व में घटती यूएस ट्रेजरी बिल की हिस्सेदारी इसी ओर इशारा कर रही है. 1996 के बाद पहली बार ग्लोबल संट्रेल बैंकों में सोना बढ़ रहा है, लेकिन यूएस ट्रेजरी बिल की हिस्सेदारी कम हो रही है.

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डॉलर का हाल

ग्लोबल इंटरनेशल रिजर्व में 2025 की पहली तिमाही में डॉलर की हिस्सेदारी दो फीसदी कम हो गई है. यह 42 फीसदी के स्तर पर है, जो 30 साल में सबसे बुरी स्थिति है. वहीं सोना तीन फीसदी बढ़कर 24 प्रतिशत तक पहुंच गया है. यूक्रेन युद्ध, अमेरिकी प्रतिबंधों का डर, टैरिफ जैसे कदम, अमेरिका का बढ़ता कर्ज डॉलर पर भरोसा कम कर रहा है. (photo credit AI, for representation only)

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