H-1B Visa Lottery Ending: ट्रम्प प्रशासन ने अमेरिका के H-1B वीजा कार्यक्रम में बड़ा बदलाव कर दिया है. दशकों पुराने रैंडम लॉटरी सिस्टम को एक वेटेड सिलेक्शन मॉडल से बदल दिया गया है. नया मॉडल ज्यादा स्किल्ड और ज्यादा सैलरी वाले आवेदकों को प्राथमिकता देता है. पर क्या आपको मालूम है कि नया सिस्टम भारतीयों को ज्यादा झटका देगा. आइये समझते हैं ऐसा क्यों है.
300,000 भारतीय प्रोफेशनल्स वीजा पर कर रहे जॉब
विशेषज्ञों के मुताबिक यह नया नियम भारत के अमेरिका जाने वाले वर्कफोर्स के एक बड़े हिस्से के लिए अवसरों को तेज़ी से कम कर सकता है. अमेरिकी प्रशासन के डेटा के अनुसार, भारतीय नागरिक H-1B कार्यक्रम की रीढ़ हैं. भारतीय हर साल जारी किए जाने वाले सभी एच-1 बी वीजा का 70% से ज़्यादा हिस्सा हैं. लगभग 300,000 भारतीय प्रोफेशनल्स वर्तमान में अमेरिका में H-1B वीज़ा पर काम कर रहे हैं. इनमें ज्यादातर टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और सर्विसेज के हैं.
किन लोगों पर नहीं पड़ेगा फर्क
नए सिस्टम के तहत, बड़ी टेक्नोलॉजी फर्मों में काम करने वाले और टॉप-टियर सैलरी कमाने वाले भारतीय कर्मचारियों को अमेरिका में रास्ते मिलते रह सकते हैं
किन लोगों पर ज्यादा असर
एंट्री-लेवल प्रोफेशनल्स, मिड-करियर इंजीनियर, और छोटी फर्मों या स्टाफिंग कंसल्टेंसी द्वारा स्पॉन्सर किए गए लोगों के मौके कम हो सकते हैं क्योंकि सैलरी लेवल सिलेक्शन में एक निर्णायक फैक्टर बन जाएगा.
ट्रंप प्रशासन पहले ही नए H-1B वीजा आवेदनों पर 100,000 डॉलर की अतिरिक्त फीस लगा चुका है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह भारत के $245-बिलियन IT सेक्टर की नींव पर चोट करता है. बड़ी मल्टीनेशनल कंपनियाँ लागत को वहन कर सकती हैं, छोटी कंपनियाँ US में नौकरियों को स्पॉन्सर करने से पूरी तरह से बाहर हो सकती हैं.
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नया H-1B नियम क्या है?
डिपार्टमेंट ऑफ़ होमलैंड सिक्योरिटी की ओर से घोषित संशोधित नियमों के तहत, अमेरिका H-1B वीजा पाने वालों को चुनने के लिए इस्तेमाल होने वाली दशकों पुरानी रैंडम लॉटरी को खत्म कर देगा और इसे एक वेटेड सिलेक्शन सिस्टम से बदल देगा. नया मॉडल ज़्यादा स्किल लेवल और ज़्यादा सैलरी वाले आवेदकों को प्राथमिकता देगा. यह नियम, जो 27 फरवरी, 2026 से लागू होगा, FY 2027 H-1B कैप रजिस्ट्रेशन सीज़न पर लागू होगा.
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