H-1B वीजा धारकों को नहीं देने होंगे 1 लाख डॉलर! ट्रंप भारतीयों के लिए बदल सकते हैं नियम

डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा H-1B वीजा शुल्क को $100,000 तक बढ़ाए जाने से भारतीय प्रोफेशनल्स में चिंता फैल गई है. लेकिन हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप सरकार कुछ श्रेणियों को इस भारी-भरकम शुल्क से राहत दे सकती है.

Published date india.com Published: September 23, 2025 8:38 AM IST
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H-1B Fees News: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने H-1B वीजा को लेकर एक बार फिर सुर्खियां बटोरी हैं. हाल ही में उन्होंने एक नए कानून पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके बाद यह अटकलें लगाई जा रही हैं कि H-1B वीजा फीस में कुछ पेशेवरों को छूट दी जा सकती है. खासकर, भारतीय डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ को इस बदलाव का सीधा लाभ मिल सकता है.

फिलहाल, ट्रंप प्रशासन ने H-1B वीजा आवेदन पर 100,000 डॉलर यानी लगभग 83 लाख रुपये का शुल्क तय किया है, जिससे अमेरिका में काम करने की योजना बना रहे हजारों भारतीय प्रोफेशनल्स को झटका लगा है. लेकिन ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप सरकार इस फीस में कुछ खास कैटेगरी को राहत देने पर विचार कर रही है और डॉक्टरों को इसमें सबसे ऊपर माना जा रहा है.

IT सेक्टर और मेडिकल प्रोफेशनल्स में चिंता

H-1B वीजा का सबसे बड़ा लाभार्थी देश भारत है. खासतौर पर आईटी कंपनियों और हेल्थकेयर सेक्टर के हजारों भारतीय पेशेवर हर साल इसी वीजा के जरिए अमेरिका में काम करते हैं. ट्रंप की नई फीस नीति के बाद भारतीय IT सेक्टर और मेडिकल क्षेत्र में हड़कंप मच गया.

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका के नामी हॉस्पिटल्स जैसे मेयो क्लिनिक, क्लीवलैंड क्लिनिक और सेंट जूड हॉस्पिटल H-1B वीजा पर भारी निर्भरता रखते हैं. अकेले मेयो क्लिनिक के पास 300 से ज्यादा H-1B स्वीकृत वीजा हैं. ऐसे में अगर यह भारी शुल्क सभी पर लागू होता है, तो अमेरिका के मेडिकल सिस्टम पर गहरा असर पड़ सकता है.

डॉक्टरों की कमी बढ़ने का खतरा

अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन (AMA) पहले ही चेतावनी दे चुकी है कि इस भारी-भरकम वीजा शुल्क से अमेरिका में डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ की गंभीर कमी हो सकती है. अमेरिकी हेल्थ सिस्टम के कई हिस्से इंटरनेशनल डॉक्टर्स और रेजिडेंट्स पर निर्भर हैं. इस परिस्थिति को ध्यान में रखते हुए व्हाइट हाउस के प्रवक्ता टेलर रोजर्स ने कहा कि नया कानून कुछ पेशेवरों को शुल्क से छूट की अनुमति देता है, जिनमें डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ शामिल हो सकते हैं.

यह शुल्क एक बार का ही होगा

ट्रंप प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि 21 सितंबर 2025 या उसके बाद दायर किए गए नए H-1B वीजा आवेदनों पर ही यह $1 लाख शुल्क लागू होगा. यह एक वन-टाइम फीस है, ना कि हर साल लगने वाला शुल्क. हालांकि, इसकी वजह से भारत-अमेरिका संबंधों में फिर से गर्माहट आ गई है.

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भारत और अमेरिका के बीच चल रही बातचीत

वीजा विवाद के बीच भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अमेरिकी सीनेटर मार्को रुबियो के बीच हाल ही में मुलाकात हुई है. उम्मीद की जा रही है कि दोनों देशों के बीच इस मसले को लेकर जल्द ही कोई सकारात्मक समाधान निकल सकता है.

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