इजरायल की मोसाद ने आधी रात को ऐसे उड़ाए थे ईरान के परमाणु सीक्रेट्स
मोसाद के एजेंटों को पता था कि वेयरहाउस में कैसे प्रवेश करना है, किस वक्त निकलना है, कैसे अलार्म को निष्क्रिय करना है.
इजरायल की मोसाद ने फिर दिया असंभव से ऑपरेशन को अंजाम.
नई दिल्ली। इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद ने एक बार फिर साबित किया कि क्यों उसे दुनिया की सर्वश्रेष्ठ एजेंसी माना जाता है. इस बार मोसाद ने एक और अविश्वनीय काम को अंजाम दिया है. मोसाद ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम का पूरा प्लान हासिल कर इसे दुनिया के सामने ला दिया. इसी के आधार पर अमेरिका ने ईरान के साथ अपना समझौता भी तोड़ लिया. न्यू यॉर्क टाइम्स में छपी खबर में सिलसिलेवार तरीके से इसे बताया गया है.
आधी रात पहुंचे मोसाद के एजेंट
मोसाद के एजेंटों को पता था कि वेयरहाउस में कैसे प्रवेश करना है, किस वक्त निकलना है, कैसे अलार्म को निष्क्रिय करना है और कैसे बड़ी तिजोरियों में से गुप्त दस्तावेज निकालने हैं. इन्हीं दस्तावेजों में परमाणु बम को लेकर ईरान की वर्षों की मेहनत, परमाणु हथियारों का डिजायन और प्रोडक्शन प्लान छुपा हुआ था.
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है इजरायल?
एक साल के सर्विलांस के बाद मोसाद को पता चला कि ईरान के गार्ड्स वेयरहाउस में सुबह 7 बजे तक की शिफ्ट में रहते हैं. इसलिए एजेंटों को साफ निर्देश था कि किसी भी कीमत पर सुबह 5 बजे तक काम को अंजाम देकर बाहर निकला जाए.
50 हजार पन्ने, 163 सीडी लेकर पहुंचे
मोसाद एजेंट 31 जनवरी 2018 की रात वेयरहाउस पहुंचे, उनके पास ऐसे टॉर्च थे जो 3600 डिग्री पर जलते थे. इनका इस्तेमाल 32 सेफ को काटने में करना था. लेकिन एजेंटों ने सभी सेफ को नहीं काटा. उस प्रमुख सेफ को काटा जिसमें सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजायन थे. जब तक समय खत्म हुआ, एजेंट इजरायल बॉर्डर तक 50 हजार पन्नों और 163 सीडी साथ लेकर पहुंच चुके थे.
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ट्रंप से बातचीत के बाद किया खुलासा
अप्रैल के आखिर में इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्र्ंप के बातचीत के बाद ईरान के गुप्त परमाणु कार्यक्रम का सार्वजनिक खुलासा किया. प्रेस के सामने विस्तार से ईरान के परमाणु कार्यक्रम का खुलासा किया. इस दौरान ऐसे कुछ दस्तावेज नहीं बताए गए क्योंकि इससे परमाणु हथियार बनाने का फॉर्मूला मिल सकता था. इजरायल का यही खुलासा अमेरिका के ईरान के साथ इस दिशा में पूर्व का समझौता खत्म करने का आधार बना.
ईरान का मंसूबा आया सामने
हालांकि, मोसाद के हाथ जो दस्तावेज लगे उनमें से कई 15 साल पुराने थे. वहीं, ईरान ने इजरायल के दावे को पूरी तरह नकारते हुए इसे साजिश करार दिया. लेकिन व्यापक जांच के बाद अमेरिका और ब्रिटेन ने इन्हें महत्वपूर्ण और असली माना. दस्तावेजों से साफ हुआ कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम काफी बड़ा था. साल 2003 में ईरान पूरी तरह संदिग्ध हो चुका था. एक दस्तावेज के मुताबिक ईरान अपनी मिसाइल शहाब 3 को परमाणु हथियार से लैस करना चाहता था.
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