ह्यूस्टन: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को आतंकवाद के समर्थन के लिए पाकिस्तान पर जमकर निशाना साधा और कहा कि अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त करने के भारत के फैसले से वे लोग परेशान हैं जो अपने ही देश को नहीं संभाल पा रहे. उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ ‘‘निर्णायक लड़ाई’’ का भी आह्वान किया.

 

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उपस्थिति में ‘हाउडी मोदी’ कार्यक्रम में आतंकवाद के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए यह बात कही. उन्होंने पाकिस्तान और उसके प्रधानमंत्री इमरान खान का नाम लिए बिना दोनों पर निशाना साधा. मोदी ने कहा कि अनुच्छेद 370 ने जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद एवं अलगाववाद को बढ़ावा दिया. उल्लेखनीय है कि मोदी सरकार ने जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 की अधिकतर धाराओं को पांच अगस्त को निरस्त कर दिया और संसद में इस कदम को मंजूरी दी गयी.


अनच्छेद 370 का ऐसे किया जिक्र
प्रधानमंत्री ने इस फैसले का उल्लेख करते हुए कहा कि देश के सामने 70 साल से एक बड़ी चुनौती थी जिसे कुछ दिन पहले भारत ने ‘फेयरवेल’ दे दिया है. प्रधानमंत्री के इतना कहते ही एनआरजी स्टेडियम में बैठे करीब 50 लोगों ने तालियां बजाकर मोदी सरकार के इस फैसले का समर्थन किया मोदी ने कहा कि अनच्छेद 370 ने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लोगों को विकास से और समान अधिकारों से वंचित रखा था. इस स्थिति का लाभ आतंकवाद और अलगाववाद बढ़ाने वाली ताकतें उठा रहीं थीं


जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लोगों को मिले सभी अधिकार
साथ ही उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इसके प्रावधानों के निरस्तीकरण से क्षेत्र का विकास होगा एवं वहां समृद्धि आएगी तथा महिलाओं, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजातियों के खिलाफ भेदभाव को खत्म करेगा. उन्होंने कहा कि अब भारत के संविधान ने जो अधिकार बाकी भारतीयों को दिए हैं, वहीं अधिकार जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लोगों को मिल गए हैं. वहां की महिलाओं-बच्चों-दलितों के साथ हो रहा भेदभाव खत्म हो गया है.


आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक जंग शुरू करने का आह्वान
उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ “निर्णायक जंग” शुरू करने का आह्वान किया और अमेरिका तथा मुंबई के आतंकवादी हमलों का संदर्भ देते हुए कहा कि आपको 9/11 और 26/11 आतंकवादी हमलों के साजिशकर्ता कहां मिलेंगे. मोदी ने कहा कि सरकार के पास संसद के उच्च सदन में बहुमत नहीं था. इसके बावजूद अनुच्छेद 370 की अधिकतर प्रावधानों को समाप्त करने के फैसले संसद ने दो तिहाई बहुमत से पारित किया.