नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय न्याय अदालत (आईसीजे) द हेग में सोमवार से कुलभूषण जाधव के मामले में सार्वजनिक सुनवाई करेगा, जिसमें भारत और पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र की शीर्ष अदालत के समक्ष अपनी-अपनी दलीलें पेश करेंगे. द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद अंतरराष्ट्रीय विवादों को हल करने के लिए आईसीजे की स्थापना की गई थी. पाकिस्तानी सेना की अदालत ने अप्रैल 2017 में जासूसी और आतंकवाद के आरोपों पर भारतीय नागरिक जाधव (48) को मौत की सजा सुनाई थी. भारत ने इसके खिलाफ उसी साल मई में आईसीजे का दरवाजा खटखटाया था. Also Read - कश्मीर में भारत 22 अक्टूबर को मनाएगा 'काला दिवस', 1947 में पाकिस्तान ने घाटी में कराई थी हिंसा

आईसीजे की 10 सदस्यीय पीठ ने 18 मई 2017 में पाकिस्तान को मामले में न्यायिक निर्णय आने तक जाधव को सजा देने से रोक दिया था. आईसीजे ने हेग में 18 से 21 फरवरी तक मामले में सार्वजनिक सुनवाई का समय तय किया है और मामले में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले हरीश साल्वे के 18 फरवरी को पहले दलीलें पेश करने की संभावना है. पाकिस्तान के वरिष्ठ अधिवक्ता खावर कुरैशी 19 फरवरी को देश की ओर से दलीलें पेश करेंगे. इसके बाद भारत 20 फरवरी को इस पर जवाब देगा जबकि इस्लामाबाद 21 फरवरी को अपनी आखिरी दलीलें पेश करेगा. ऐसी उम्मीद है कि आईसीजे का फैसला 2019 की गर्मियों में आ सकता है. Also Read - आतंकियों को पनाह देना अब पाकिस्तान को पड़ेगा भारी, ग्रे लिस्ट से ब्लैक लिस्टेड भी हो सकता है

भारत संयुक्त राष्ट्र की शीर्ष अदालत से भारतीय जासूस की मौत की सजा को रद्द करने का पाकिस्तान को आदेश देने का अनुरोध करेगा. इससे, जम्मू कश्मीर में सुरक्षा कर्मियों पर हुए घातक हमले के बाद दोनों देशों के बीच फिर से तनाव बढ़ सकता है. कुलभूषण सुधीर जाधव को मार्च 2016 में पाकिस्तन के अशांत प्रांत बलूचिस्तान से जासूसी के आरोप में गिरफ्तार किया गया था और उन्हें एक सैन्य अदालत ने मौत की सजा सुनाई थी. जम्मू कश्मीर में बृहस्पतिवार को एक फिदायीन हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय अदालत में दो परमाणु हथियारों से लैस प्रतिद्वंद्वियों के बीच यह टकराव का एक और मसला हो सकता है. इस हमले में 40 सुरक्षा कर्मियों की जान गई है. Also Read - कॉल सेंटर घोटालेबाज: कनाडा में छात्रों को ठग रहा था भारतीय, कई और इसमें शामिल

जाधव भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारी हैं. उनपर पाकिस्तान में अफगानिस्तान से लगते सूबे में भारतीय खुफिया एजेंसी के लिए काम करने का आरोप है. पाकिस्तान लंबे अरसे से भारत पर बलूचिस्तान के अलगाववादी बागियों को समर्थन देने का आरोप लगाता है.भारत का कहना है कि जाधव जासूस नहीं हैं और उन्हें पाकिस्तान में अगवा किया गया है. भारत के अदालती दस्तावेज कहते हैं कि अंतरराष्ट्रीय अदालत इस्लामाबाद को जाधव की सजा रद्द करने का आदेश दे.

भारत ने जाधव को राजनयिक सम्पर्क की सुविधा नहीं देकर पाकिस्तान पर वियना संधि का उल्लंघन करने और उनके मानवाधिकारों का हनन करने का आरोप लगाया है.भारत ने कहा है कि अगर पाकिस्तान जाधव की मौत की सजा रद्द नहीं करता है तो इस्लामाबाद को अंतरराष्ट्रीय कानून एवं संधियों का उल्लंघन करने वाला करार देना चाहिए और भारतीय नागरिक को तुरंत रिहा करने का आदेश देना चाहिए.