संयुक्त राष्ट्र. संयुक्त राष्ट्र महासभा की अध्यक्ष मारिया फर्नांडा एस्पिनोसा (Ma Fernanda Espinosa) का कहना है कि सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने में भारत की सफलता दुनिया का रुख बदल सकती है. उन्होंने दुनिया की बहुपक्षीय प्रणाली में भारत को एक महत्वपूर्ण भागीदार बताया. एस्पिनोसा का कहना है कि 193 सदस्यीय संयुक्त राष्ट्र महासभा की अध्यक्ष रहते हुए वह भारत के साथ संपर्क बढ़ाने और उसके साथ मिलकर काम करने की इच्छुक हैं. उन्होंने कहा, बहुपक्षीय प्रणाली में भारत महत्वपूर्ण भागीदार है. यह संयुक्त राष्ट्र के लिए मित्र देश है. यदि भारत 2030 एजेंडा को हासिल करने में सफल रहता है तो वह दुनिया का रुख बदल सकता है. यहां हम भारत के रूप में करीब 1.30 अरब लोगों की बात कर रहे हैं. Also Read - भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव से चिंतित हैं UN GA अध्यक्ष, कहा- कूटनीति से हल करें मतभेद

इक्वाडोर की पूर्व विदेश मंत्री एस्पिनोसा को जून, 2018 में संयुक्त राष्ट्र महासभा का 73वां अध्यक्ष चुना गया. वह 193 सदस्यीय सदन के 73 वर्ष लंबे इतिहास में चौथी महिला अध्यक्ष हैं. बता दें कि भारतीय राजनयिक और देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की बहन विजयलक्ष्मी पंडित 1953 में संयुक्त राष्ट्र महासभा की पहली महिला अध्यक्ष चुनी गई थीं. बाद में लाइबेरिया की एंजी एलिजाबेथ ब्रूक्स 1969 में और बहरीन की शेख हया राशिद अल खलीफा 2006 में महासभा की अध्यक्ष चुनी गईं. संयुक्त राष्ट्र महासभा का अध्यक्ष पद संभालने से पहले एस्पिनोसा ने भारत की यात्रा कर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से भेंट की थी. अपनी भारत यात्रा को याद करते हुए कहा कि उन्हें यह देखकर बहुत खुशी हुई कि किस प्रकार से देश में जमीनी स्तर पर सतत विकास लक्ष्यों को लागू किया जा रहा है. संयुक्त राष्ट्र के विभिन्न उपक्रमों के लिए भारत की सहायता की प्रशंसा करते हुए एस्पिनोसा ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन में सैनिकों का योगदान देने वाले देशों में भारत बहुत महत्वपूर्ण है.

एस्पिनोसा ने पर्यावरण के क्षेत्र में संयुक्त राष्ट्र का सर्वोच्च पुरस्कार ‘यूएनईपी चैम्पियन्स ऑफ द अर्थ’ अवार्ड से सम्मानित किए जाने पर प्रधानमंत्री मोदी को बधाई दी. प्रधानमंत्री को यह पुरस्कार अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन में उनके नेतृत्व और 2022 तक देश से एकल इस्तेमाल वाले प्लास्टिक को खत्म करने की प्रतिबद्धता के लिए दिया गया है. एस्पिनोसा ने कहा कि भारत ने स्वच्छता और शहरीकरण के क्षेत्रों में कई चुनौतियों का सामना किया है. उन्होंने कहा कि भारत बड़ी आबादी वाला देश है और ग्रामीण तथा शहरी क्षेत्रों के बीच संतुलन, सेवाओं तक पहुंच बड़ी चुनौती है. लेकिन अगर आपके अंदर राजनीतिक इच्छाशक्ति है, आपके पास समुचित योजना है और आप प्रतिबद्ध हैं तो चुनौतियां आपके लिए अवसर बन जाएंगी.

(इनपुट – एजेंसी)