ईरान पर दिखने लगा अमेरिकी नाकेबंदी का असर! मजबूरी में उठाया ये कदम, क्या खार्ग द्वीप पर स्टोरेज खत्म हो गया?
कच्चे तेल का निर्यात चालू रहने पर भंडारण की दिक्कत नहीं होती. लेकिन, निर्यात बंद हो जाने के कारण ईरान को भंडारण की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.
US blockade: ओमान की खाड़ी में ईरान के खिलाफ अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी जारी है. अमेरिकी नौसेना ईरान के बंदरगाहों की तरफ जाने वाले या ईरानी तेल लेकर निकल रहे किसी भी जहाज को यात्रा की अनुमति नहीं दे रही है. अब इस नाकेबंदी का असर भी दिखने लगा है. ईरान को कच्चा तेल स्टोर करने के लिए एक पुराने तेल टैंकर को दोबारा इस्तेमाल में लाना पड़ा है.
क्या है पूरा मामला
टैंकर ट्रैकर्स के अनुसार, ईरान ने एक विशाल पुराना क्रूड कैरियर (VLCC) 'नाशा' को दोबारा इस्तेमाल किया है. यह इस बात का संकेत है कि जमीन पर मौजूद स्टोरेज खत्म होने वाला है. तेल रखने के लिए कोई स्टोरेज न होने और उसे विदेश भेजने के लिए कोई एक्सपोर्ट न होने के कारण ईरान को जल्द ही तेल उत्पादन में कमी लानी पड़ेगी या उसे रोकना पड़ेगा. क्रूड कैरियर 'नाशा' पिछले कुछ सालों से खाली ही खड़ा था. यह 30 साल पुराना शिप है.
ईरान को आर्थिक झटका देना चाहते हैं ट्रंप
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप नाकेबंदी से ईरान को आर्थिक झटका देना चाहते हैं. ईरान के तेल के सभी निर्यात रोकने से देश की मुश्किलें बढ़ सकती हैं. कच्चे तेल का निर्यात चालू रहने पर भंडारण की दिक्कत नहीं होती. लेकिन, निर्यात बंद हो जाने के कारण ईरान को भंडारण की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. ऐसे ही कुछ और दिन चला तो ईरान को कच्चे तेल का उत्पादन या तो बंद करना पड़ेगा या फिर कम करना पड़ेगा. इससे पहले से ही मुश्किल में फंसी देश की अर्थव्यवस्था और बदतर हो सकती है.
Investing.com द्वारा प्रकाशित एक विश्लेषण में बताया गया है कि ईरान की जमीनी भंडारण क्षमता लगभग 86 मिलियन बैरल है. इस हफ्ते की शुरुआत में यह आधी भर गई थी. विश्लेषण में कहा गया है कि अगर नाकेबंदी के कारण निर्यात रुका रहता है, तो ईरान 22 दिनों तक तेल का भंडारण जारी रख सकता है. ईरान के पास उपलब्ध चार VLCCs (बहुत बड़े कच्चे तेल के टैंकर) को भी इस्तेमाल किया जाए तो यह अवधि बढ़कर 26 दिन हो जाती है.
अपने रुख पर अड़े हैं ईरान और ट्रंप
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि जब तक ईरान कोई समझौता नहीं करता, तब तक अमेरिका स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अपना नियंत्रण बनाए रखेगा. उन्होंने साफ कहा है कि इस अहम तेल मार्ग को दबाव बनाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस रास्ते को बंद रखने का मकसद ईरान की अर्थव्यवस्था पर दबाव डालना है. ट्रंप के अनुसार, अगर यह रास्ता खोला जाता है तो ईरान रोज़ाना करीब 500 मिलियन डॉलर कमाएगा.
ट्रंप ने अमेरिकी नौसेना के लिए सख्त आदेश भी जारी किया है. ट्रंप ने अमेरिकी नौसेना को संदिग्ध गतिविधियों में शामिल किसी भी नाव को तत्काल नष्ट करने का आदेश दिया है. साथ ही उन्होंने माइन-स्वीपिंग अभियानों को और तेज करने को कहा है.
दूसरी तरफ ईरान भी अपने रुख पर अड़ा है. ईरान का कहना है कि जब तक अमेरिका की नौसैनिक नाकेबंदी जारी रहेगी, वह होर्मुज़ जलडमरूमध्य को नहीं खोलेगा. अमेरिका और ईरान के बीच किसी बातचीत की संभावना भी नजर नहीं आ रही है. ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकेर ग़ालिबफ ने कहा है कि पूर्ण संघर्ष-विराम का तभी कोई अर्थ है जब नौसैनिक नाकेबंदी के जरिए उसका उल्लंघन न किया जाए.
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