इस्लामाबाद: पाकिस्तान की इमरान सरकार सख्त रवैया अपनाते हुए विपक्षी पार्टी पीपीपी के शीर्ष नेताओं पर विदेशी यात्रा करने पर लगी रोक को बरकरार रखा है. पाकिस्तान सरकार ने पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी व सह-अध्यक्ष और पूर्व राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी समेत पार्टी के शीर्ष नेताओं पर विदेश यात्रा प्रतिबंध जारी रखने का फैसला किया है. डॉन न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, इसका फैसला प्रधानमंत्री इमरान खान की अध्यक्षता में गुरुवार को संघीय मंत्रिमंडल की एक बैठक में लिया गया.

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मंत्रिमंडल ने 27 दिसंबर की बैठक में फर्जी बैंक खातों व धनशोधन (मनी लाउंडरिंग) मामलों के 172 संदिग्धों का नाम एक्जिट कंट्रोल लिस्ट (ईसीएल) में रखने का फैसला किया है. इसमें पीपीपी के शीर्ष नेताओं व बहरिया टाउन के मालिक मलिक रियाज के नाम शामिल हैं.

पीपीपी ने प्रधानमंत्री के फैसले को बताया तानाशाही
डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, पीपीपी ने इस नतीजे को ‘तानाशाही फैसला’ बताया. पीपीपी नेता नफीसा शाह ने एक बयान में कहा, “मंत्रिमंडल के फैसले से इमरान खान का न सिर्फ द्वेषपूर्ण चेहरा सामने आया है, बल्कि देश में जारी तानाशाही का सच भी उजागर हुआ है, जो सर्वोच्च न्यायालय का फैसला तक स्वीकार नहीं करता.”

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सर्वोच्च न्यायालय कर रहा है मामले की निगरानी
हालांकि, सर्वोच्च न्यायालय ने 31 दिसंबर को सरकार को फैसले की समीक्षा का आदेश दिया था. सर्वोच्च न्यायालय इस मामले की निगरानी कर रहा है. मंत्रिमंडल ने अपनी पिछली बैठक में गृह मंत्रालय की एक विशेष समिति को मामले की समीक्षा के लिए भेजा था. समिति ने गुरुवार को मंत्रिमंडल को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें ईसीएल से 20 नामों को हटाए जाने की सिफारिश की. इसमें पीपीपी नेताओं के नाम भी शामिल थे.

लेकिन, प्रधानमंत्री इमरान खान व उनकी टीम ने सिफारिशों को खारिज कर दिया और फैसला किया कि पीपीपी के शीर्ष नेताओं के नाम ईसीएल में बने रहेंगे. सूचना मंत्री फवाद चौधरी ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय से विस्तृत लिखित आदेश प्राप्त होने तक पीपीपी नेताओं के नाम ईसीएल में बने रहेंगे.

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