नई दिल्ली: पाकिस्तान में हुए आम चुनाव में अब तक आए नतीजों में पूर्व क्रिकेटर इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) बड़ी पार्टी बनकर उभरी है. उम्मीद जताई जा रही है कि इमरान खान पाकिस्तान के अगले प्रधानमंत्री होंगे. वह छोटी पार्टियों और निर्दलीयों के साथ पाकिस्तान में अगली सरकार बना सकते हैं. इस चुनाव में सेना के दखल की बात कही जा रही है. कुछ लोगों का कहना है कि सेना ने इस चुनाव में इमरान खान को सपोर्ट किया. ठीक 5 साल पीछे जाएं और 2013 के चुनाव को याद करें तो उस समय इमरान खान ने नवाज शरीफ के खिलाफ यही आरोप लगाए थे. एक साल तक उन्होंने रैली की और ये मुहिम चलाया कि सेना की मदद से नवाज शरीफ पीएम बने हैं. यही आरोप आज इमरान खान पर लग रहे हैं.

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अगर इमरान खान पाकिस्तान के वजीरे आजम बनते हैं तो भारत के साथ पाकिस्तान के रिश्ते कैसे होंगे? पीटीआई के घोषणा पत्र रोड टू नया पाकिस्तान में भारत के साथ बेहतर रिश्ते का वादा किया गया है. भारत के साथ शांति सुनिश्चित करने के लिए नीतियां बनाने की भी बात कही गई है. साथ ही कश्मीर मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों के तहत सुलझाने की भी बात कही गई है.

चुनावी रैलियों में इमरान पूर्व पीएम नवाज शरीफ को पीएम मोदी का दोस्त बताते आए हैं. यहां तक कि अपना वोट डालने के बाद इमरान ने कहा कि नवाज शरीफ मोदी और भारतीय मीडिया के पसंदीदा हैं. मैं पीएम बनूंगा तो पाकिस्तान के हक में बात करूंगा. हालांकि सत्ता में आने के बाद हर किसी की भाषा बदल जाती है.

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इमरान में सभी लोगों को साथ लेकर चलने की क्षमता है. क्रिकेट के मैदान में एक कप्तान के तौर पर उन्होंने खुद को साबित किया है. वह युवाओं में काफी ज्यादा फेमस हैं. उन्होंने भ्रष्टाचार को मुद्दा बनाया और उसे वोटों में बदलने में सफल रहे. इमरान भारत आते-जाते रहे हैं. वह भारत के बारे में अच्छी तरह से जानते हैं. क्रिकेटर के तौर पर वह भारत से अच्छी तरह से परिचित हैं. लेकिन एक नेता के तौर पर दोनों देशों के बीच रिश्ते बनाना उनके लिए बड़ी चुनौती है.

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इमरान के भाषणों से लगता है कि वह पीएम मोदी को पसंद नहीं करते. पीएम मोदी ने अपने शपथ ग्रहण समारोह में पाकिस्तान के पीएम को बुलाकर इतिहास रचा था. इमरान खान के सामने भी एक मौका हो सकता है. हालांकि वह ऐसा करेंगे कि नहीं यह समय ही बताएगा. भारत में भी एक साल बाद चुनाव होने वाले हैं. यह नई सरकार पर निर्भर करेगा कि इमरान खान के साथ किस तरह का व्यवहार करती है. हालांकि उससे पहले पीएम मोदी और इमरान खान सार्क समिट में मिल सकते हैं.