नई दिल्ली/ कोलंबो: विदेश मंत्रालय ने रविवार को कहा कि भारत, श्रीलंका में बदलते राजनीतिक घटनाक्रम पर बारीकी से नजर रखे हुए है. श्रीलंका में राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना ने प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे को पद से हटाने के बाद पूर्व राष्ट्रपति महिदा राजपक्षे को प्रधानमंत्री नियुक्त किया है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने मीडिया द्वारा पूछे गए एक सवाल के जवाब में कहा, “भारत, श्रीलंका के हालिया राजनीतिक घटनाक्रम पर बारीकी से नजर रखे हुए है.” Also Read - कश्मीर में भारत 22 अक्टूबर को मनाएगा 'काला दिवस', 1947 में पाकिस्तान ने घाटी में कराई थी हिंसा

वहीं, रविवार को श्रीलंका की संसद के स्पीकर कारु जयसूर्या ने संकट में घिरे रानिल विक्रमसिंघे को बड़ी राहत देते हुए रविवार को उन्हें देश के प्रधानमंत्री के तौर पर मान्यता दे दी.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता कुमार ने कहा, “एक लोकतंत्र और नजदीकी पड़ोसी मित्र होने के नाते हमें आशा है कि लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक प्रक्रिया का सम्मान किया जाएगा.” उन्होंने कहा, “हम श्रीलंका के मित्रवत लोगों के लिए हमारी विकासात्मक सहायता देना जारी रखेंगे.”

बता दें कि बीते शुक्रवार को शुक्रवार रात को सिरिसेना ने ‘बर्खास्त’ नेता विक्रमसिंघे और उनकी युनाइटेड नेशनल पार्टी (यूएनपी) को हैरत में डालते हुए राजपक्षे को राष्ट्र का नया प्रधानमंत्री नियुक्त कर दिया था.

श्रीलंका की संसद के स्पीकर कारु जयसूर्या ने संकट में घिरे रानिल विक्रमसिंघे को बड़ी राहत देते हुए रविवार को उन्हें देश के प्रधानमंत्री के तौर पर मान्यता दे दी. संसद के स्पीकर ने कहा कि संसद को निलंबित करने का फैसला स्पीकर के साथ विचार-विमर्श के बाद लिया जाना चाहिए.

यूएनपी नेता रानिल विक्रमसिंघे को राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरीसेना ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री के पद से बर्खास्त कर दिया था. सिरीसेना को लिखे एक पत्र में जयसूर्या ने 16 नवंबर तक सदन को निलंबित करने के उनके फैसले पर सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि इससे देश को गंभीर एवं अवांछनीय परिणाम भुगतने पड़ेंगे.

स्पीकर कारु जयसूर्या ने राष्ट्रपति से विक्रमसिंघे को सरकार के नेता के तौर पर मिले विशेषाधिकार फिर से बहाल करने को कहा. उन्होंने विक्रमसिंघ के बारे में कहा कि लोकतंत्र एवं सुशासन कायम करने के लिए उन्होंने जनादेश हासिल किया है.

जयसूर्या ने कहा, “16 नवंबर तक संसद भंग रखने से हमारे देश को गंभीर एवं अवांछनीय परिणाम भुगतने होंगे और मैं आपसे विनम्र आग्रह करता हूं कि इस पर फिर से विचार करें.”

स्पीकर स्पीकर ने कहा, ”मेरे विचार से, यह मेरा कर्तव्य है कि मैं आपका ध्यान उस प्रक्रिया की तरफ आकर्षित करूं जिसके तहत संसद स्थगित करने का फैसला अध्यक्ष के परामर्श से लिया जाना चाहिए.” अध्यक्ष ने विक्रमसिंघे की सुरक्षा वापस लेने के सिरीसेना के फैसले पर भी सवाल उठाए.