भारत की 'रॉकेट वुमन' ने पहनी साड़ी अमेरिका ने म्यूजियम में लगा दी, कौन हैं नंदिनी हरिनाथ?

Nandini Harinath: भारत की ‘रॉकेट वुमेन’ में से एक, नंदिनी हरिनाथ ने भारत को मंगल ग्रह तक पहुंचाने में मदद की थी.

Written by: Vineet Sharan Edited by: Vineet Sharan
Updated: May 12, 2026, 9:16 AM IST

Nandini Harinath: अमेरिका के एक मशहूर हवाई और अंतरिक्ष म्यूजियम में एक साड़ी प्रदर्शनी के लिए रखी गई है. हाई-टेक उपकरणों के लिए मशहूर इस म्यूजियम में एक साड़ी को प्रदर्शित करना चौंकाता है. यह साड़ी भारत की मशहूर महिला वैज्ञानिक नंदिनी हरिनाथ की है.

कौन-सा है ये म्यूजियम

साड़ी की प्रदर्शनी लगाने वाला यह म्यूजियम वॉशिंगटन, डीसी में स्थित स्मिथसोनियन का नेशनल एयर एंड स्पेस म्यूजियम है. यह मशहूर हवाई जहाजों और अंतरिक्ष से जुड़ी चीज़ों को रखने के लिए जाना जाता है.

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संग्रहालय ने एक वीडियो और एक तस्वीर साझा की, जिसमें एक पुतला (mannequin) चमकीले लाल और नीले रंग की साड़ी पहने हुए था, जिस पर बारीक डिजाइन बने थे. इस साड़ी के साथ में एक नीला ब्लाउज भी था.

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कौन हैं नंदिनी हरिनाथ

यह साड़ी नंदिनी हरिनाथ की है, जो इसरो की मशहूर “रॉकेट वूमेन” में से एक हैं. उनके नेतृत्व ने भारत के मार्स ऑर्बिटर यानी मिशन मंगलयान में अहम भूमिका निभाई थी.

नंदिनी की मां गणित की टीचर थीं और पिता इंजीनियर थे. उन्होंने इंजीनियरिंग में अपनी ग्रेजुएशन और पोस्ट-ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की थी. इसके बाद नंदिनी ISRO में शामिल हो गईं. भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी में अपने 20 साल से ज्यादा लंबे करियर में, उन्होंने 14 से ज्यादा मिशनों में सहयोग दिया है.

साड़ी क्यों म्यूजियम में प्रदर्शित हुई

स्मिथसोनियन ने एक इंस्टाग्राम पोस्ट में लिखा, नंदिनी ने यह साड़ी उस दिन पहनी थी, जिस दिन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन का अंतरिक्ष यान सफलतापूर्वक पृथ्वी की कक्षा से बाहर निकला और मंगल ग्रह की 300 दिन की यात्रा पर निकला. भले ही यह साड़ी कभी धरती के वायुमंडल से बाहर नहीं गई, लेकिन इसे पहनने वाली महिला ने भारत को दूसरे ग्रह तक पहुंचाने में मदद की.

मंगलयान मिशन को किया याद

इस अंतरिक्ष वैज्ञानिक ने कोंडे नास्ट ट्रैवलर (Condé Nast Traveller) को दिए एक इंटरव्यू में कहा, मंगलयान इसलिए खास था क्योंकि बहुत सारे लोग हमें देख रहे थे. और अपनी विशेषज्ञता और काबिलियत के लिए पहचान मिलना बहुत अच्छा लगता है. प्रधानमंत्री ने हमसे हाथ मिलाया. नासा ने हमें बधाई दी; अब वे हमारे साथ मिलकर काम कर रहे हैं. आम जनता, संस्थाएं, स्कूल सभी इसमें बहुत दिलचस्पी ले रहे थे.

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