सिंगापुर: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और सिंगापुर के प्रधानमंत्री ली एच.लूंग द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत बनाने पर सहमत हुए हैं. दोनों पक्षों ने रक्षा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के साथ ही नौसेनाओं के बीच लॉजिस्टिक सहयोग सहित आठ समझौतों पर हस्ताक्षर किए. दोनों नेताओं के बीच आपसी हितों से जुड़े क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विस्तृत बातचीत हुई. उन्होंने हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में शांतिपूर्ण , मुक्त और दोस्ताना नौवहन परिवेश की वकालत की. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और सिंगापुर के बीच रणनीतिक साझेदारी समय की कसौटी पर खरी उतरी है. ली के साथ विस्तृत चर्चा के बाद जारी एक संयुक्त बयान में मोदी ने कहा ,‘ हमने विस्तृत आर्थिक सहयोग समझौते (सेका) की दूसरी समीक्षा सफलतापूर्वक पूरी कर ली है, हालांकि हम इस बात पर सहमत हैं कि यह केवल हमारा लक्ष्य मात्र ही नही है बल्कि इसके जरिये हम नए मुकाम हासिल करेंगे.

इन मुद्दे पर हुए समझौते
दोनों नेताओं की उपस्थिति में दोनों देशों के बीच लोक सेवा अधिकारियों के प्रशिक्षण, साइबर सुरक्षा, मादक पदार्थ नियंत्रण और दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच एक दूसरे के साजो – सामान और सुविधाओं में सहयोग सहित कई क्षेत्रों में सहमति ज्ञापनों का आदान प्रदान किया गया. उन्होंने कहा , ‘ हमारे अधिकारी जल्दी ही इस समझौते को बेहतर बनाने और समीक्षा करने पर चर्चा शुरू करेंगे. भारत और सिंगापुर के बीच 2004 में व्यापक आर्थिक सहयोग समझौता होने के बाद से दोनों देशों का द्विपक्षीय व्यापार दोगुने से भी अधिक हो गया है. इस दौरान द्विपक्षीय व्यापार 12 अरब सिंगापुर डॉलर (8.97 अरब डालर) से बढ़कर 25 अरब सिंगापुर डॉलर (18.69 अरब डालर) हो गया है. वित्त वर्ष 2016 मे सिंगापुर भारत में दूसरा सबसे बड़ा निवेशक रहा है.

इन बातों पर भी बनी सहमति
मोदी ने दोनों देशों के बीच करीबी रक्षा सहयोग की तारीफ की और दोनो देशों की नौसेनाओं के बीच लाजिस्टिक समझौता पूरा होने का स्वागत किया. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा , ‘ आने वाले समय में साइबर सुरक्षा, चरमपंथ और आतंकवाद से निपटना हमारे बीच सहयोग के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में होगा.’ मोदी और ली ने क्षेत्रीय तथा वैश्विक चुनौतियों पर विचारों का आदान- प्रदान किया , समुद्री सुरक्षा पर अपना रूख दोहराया और नियम आधारित वैश्विक व्यवस्था के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जतायी. दोनों नेताओं के बीच मुक्त, स्थिर और स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय व्यापार माहौल बनाए रखने पर सहमति बनी.

2 परियोजनाओं का जिक्र
मोदी ने कहा, ‘ हम हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में शांतिपूर्ण, मुक्त और मित्रवत समुद्री परिवेश बनाने पर सहमत हुए. वहीं प्रधानमंत्री ली ने कहा कि द्विपक्षीय रक्षा संबंध और मजबूत हुए हैं. ली ने कहा , ‘ हमारा रक्षा संबंध मजबूत हुए हैं, हमारी नौसेनाओं के बीच लॉजिस्टिक क्षेत्र में सहयोग पर आज समझौता हुआ और इस वर्ष सिंगापुर-भारत द्विपक्षीय नौवहन अभ्यास की 25 वीं वर्षगांठ भी मनाएंगे. उन्होंने कहा कि भारत और सिंगापुर राष्ट्रीय और राज्य दोनों स्तरों पर तकनीकी, स्मार्ट शहरों और कौशल विकास के क्षेत्र मे सहयोग कर रहे हैं. उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की 2015 की यात्रा के बाद शुरू हुई दो परियोजनाओ का जिक्र किया, जा पूरी हो चुकी हैं. ली ने कहा, ‘ आंध्र प्रदेश अमरावती शहर परियोजना सिंगापुर कंर्सोटियम के साथ सही दिशा में बढ रही है. पुणे में हवाईअड्डे की योजना और विकास में आर्थिक सहयोग का विकल्प तलाशने के लिए हमने हाल ही में महाराष्ट्र – सिंगापुर संयुक्त समिति गठित की है. ’’

भारत एक महत्वपूर्ण बाजार
उन्होंने कहा कि सिंगापुर की फिन – टेक कंपनियों के लिए भारत एक महत्वपूर्ण बाजार है. जबकि वैश्विक फिन – टेक हब के रूप में सिंगापुर दक्षिणपूर्व एशियाई बाजार में प्रवेश हेतु भारत के लिए गेटवे का काम कर सकता है. दोनों देशों के बीच फिन – टेक के लिए संयुक्त कार्य समूह के गठन पर भी सहमति बनी है. मोदी का कहना है कि सिंगापुर हमेशा से भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश और अन्य देशों में निवेश का स्रोत रहा है. यह भारतीयों के लिए भी पसंदीदा निवेश स्थान रहा है.

रुपे कार्ड लॉन्च
उन्होंने कहा कि भारत और सिंगापुर के बीच हवाई यातायात तेजी से बढ रहा है और दोनों देश जल्दी ही नए ‘ हवाई सेवा समझौता ’ करेंगे. उन्होंने कहा कि सिंगापुर में कल रुपे, भीम और यूपीआई आधारित एप का अंतरराष्ट्रीय लांच डिजिटल इंडिया कदम और दोनों पक्षों की साझेदारी मे नई ऊर्जा को दर्शाता है.प्रधानमंत्री ली ने कहा कि भारतीय पर्यटक अब चांगी हवाईअड्डा और देश के चुनिंदा ऑपरेटर्स के पास अपने रुपे कार्ड से ई – पेंमेंट कर सकेंगे.